शुगर मिलों की ओर से पावर कारपोरेशन को बेची गई बिजली के रुपयों से प्रशासन किसानों के जख्म पर मरहम लगा सकता है। इसके लिए उसे जिले के मिलों की ओर से बेची गई बिजली के रुपयों के भुगतान का इंतजार है।
गौरतलब है कि, शुगर मिलों ने किसानों के गन्ने की मदद से बनाई गई 453 करोड़ रुपये की बिजली पावर कारपोरेशन को बेची है, जिसका अभी भी भुगतान नहीं हुआ है। इसमें जिले की मिलों के 117 करोड़ रुपये भी बकाया हैं, मिलों पर जिले के किसानों के 165 करोड़ रुपये बकाया है। यह धनराशि डीएम और डीसीओ के संयुक्त खाते में आती है। उधर, इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) ने प्रदेश सरकार का ध्यान खींचा है, मगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
ये है व्यवस्था
अमरोहा। भाकियू के प्रांतीय महासचिव चौधरी दिवाकर सिंह ने बताया कि पहले शुगर मिलों से खरीदी हुई बिजली का रुपया ट्रांसफर किए जाने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब मिलों के खाते में भेजने की बजाय बेची गई बिजली के रुपये जिला गन्ना अधिकारी और डीएम के संयुक्त खाते में ट्रांसफर होनी है। डीसीओ और डीएम की सहमति के बाद रुपया शुगर मिलों को देेने का प्रावधान है। इस रुपये से किसानों का भुगतान भी कराने का प्रावधान है।
ये है किसानों का बकाया(करोड़ रुपये में)
वेव शुगर मिल धनौरा 49
असमोली शुगर मिल 17.09
द किसान सहकारी चीनी मिल गजरौला, हसनपुर 21.61
राणा शुगर मिल बेलवाड़ा 28.06
त्रिवेणी शुगर मिल चंदनपुर 27.04
धामपुर शुगर मिल 25.23
स्योहारा शुगर मिल 7.61
दिवान शुगर मिल अगवानपुर 27.52
शुगर मिलों ने इतने की बेची है बिजली(रुपये करोड़ में)
शुगर मिल असमोली 44
त्रिवेणी शुगर मिल चंदनपुर 5
राणा शुगर मिल बेलवाणा 27
वेव शुगर मिल धनौरा 41
कुल रुपये 117
शुगर मिलों ने जो बिजली पावर कारपोरेशन को बेची थी, उसका पैसा अभी सरकार से नहीं मिला है। सरकार से पैसा मिलते ही किसानों केे गन्ने का भुगतान करा दिया जाएगा। विजय बहादुर सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
प्रदेश सरकार से शुगर मिलों से खरीदी हुई बिजली के रुपयों को किसानों का भुगतान कराने की मांग की गई है।
- चौ. दिवाकर, प्रांतीय महासचिव, भाकियू(भानु गुट)