परिषदीय स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं का दौर शुरू हो गया। जिले के 1266 परिषदीय स्कूलों में करीब एक लाख बच्चे परीक्षा में हिस्सा ले रहे हैं। परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में तैयार कराए गए हैं। जिनको बीआरसी के माध्यम से स्कूलों को पहुंचाया गया। सोमवार को पहले दिन परीक्षा में अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। कहीं बच्चों ने फर्श पर बैठकर परीक्षा दी, तो कहीं परीक्षा के लिए आए प्रश्नपत्र ही कम निकले। फोटो स्टेट कराकर प्रश्नपत्रों को पूरा किया गया। इसके अलावा एक स्कूल में शिक्षकों की लापरवाही से करीब एक घंटे की देरी से प्रश्नपत्र पहुंचे। जिससे बच्चों को प्रश्नपत्र का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा।
एक ही कक्ष में बैंच और फर्श पर बैठकर दी परीक्षा
अतरासी के प्राथमिक विद्यालय में भी अव्यवस्थाएं रहीं। यहां एक ही कमरे में बच्चे फर्श के साथ ही जमीन पर बैठकर परीक्षा देते मिले। इसके साथ ही जोया ब्लॉक के श्योनाली में कई कक्षाओं के बच्चे एक ही कक्ष में बैठकर परीक्षा दे रहे थे।
एक घंटे बाद मिला प्रश्नपत्र
परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों को लेकर भी शिक्षकों की लापरवाही देखने को मिली। भीमा सुल्तानपुर के परिषदीय स्कूल में बच्चों को समय से पेपर नहीं मिल सका। बच्चों को उत्तर पुस्तिकाएं तो दे दी गईं, लेकिन प्रश्नपत्र के लिए बच्चों को एक घंटे से भी अधिक का इंतजार करना पड़ा। प्रश्नपत्र मिलने के बाद ही बच्चे परीक्षा दे सके।
परीक्षा के दौरान शिक्षकों का प्रशिक्षण, एक के जिम्मे स्कूल
परिषदीय स्कूलों में वार्षिक परीक्षा के दिन से ही जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में शिक्षकों का आवश्यकता आधारित तीन दिवसीय प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। वार्षिक परीक्षा के बीच 52 शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए डायट में बुलाया गया। शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जाने के कारण कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम हो गई। कई स्कूल तो ऐसे हैं, परीक्षा की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के कंधों पर रह गई है। जैसे-तैसे कर शिक्षकों ने परीक्षा की व्यवस्थाओं को पूरा किया। वहीं मंडी धनौरा के एक स्कूल में भी परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र कम निकलने का मामला सामना आया है।
- भीमा सुल्तानपुर में बच्चों को प्रश्नपत्र देरी से मिलने की जानकारी नहीं हैं। सभी विद्यालयों में समय से पेपर भेज दिए गए थे। अगर ऐसा मामला है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।- उदयवीर सिंह, बीईओ हसनपुर