प्रदूषण की चपेट में आम जनमास ही नहीं बल्कि पशु पक्षी भी हैं। इसका असर हजारों किमी दूरी से लंबी उड़ान भरकर हर वर्ष ब्रजघाट आने वाले साइबेरियन पक्षियों पर भी देखने को मिला है। ब्रजघाट में हर साल इन दिनों में मेहमान पक्षियों के पहुंचने पर लोग उन्हें देखने पहुंचने थे। लेकिन इस बार गंगा में बढ़ते प्रदूषण के कारण अब तक रंग-बिरंगे मेहमान पक्षियों की आमद देखने को नहीं मिल पाई है।
सोवियत रूस का साइबेरिया प्रांत विश्व का सबसे ठंडा क्षेत्र माना जाता है। वहां जलाशयों में सर्दी के मौसम में बर्फ की मोटी परत जम जाती है। इस कारण नदी, पोखर एवं तालाबों में रहकर, जिंदगी बसर करने वाले सारस, बत्तख, चहा, मुर्गाबी, सुर्खाब समेत विभिन्न प्रजाति के साइबेरियन जलीय पक्षियों का वहां रहना दूभर हो जाता है। जीवन के लिए सुरक्षित स्थान की तलाश में तलाश में मजबूरी में भारत में प्रवेश करते हैं।
माना जाता है कि करीब दो दशक पहले तक मेहमान पक्षियों का आगमन बड़े पैमाने पर होता था। इससे गंगा नगरी क्षेत्र के जलाशयों की रंगत बढ़ जाती थी। लेकिन गंगा में बढ़ते प्रदूषण, जल स्त्रोतों में गिरावट और असुरक्षा की भावना के कारण पक्षियों की तादाद लगातार घटती जा रही है। इस बार अभी तक ब्रजघाट गंगा के आसपास साइबेरियन पक्षी नहीं दिखाई दिए हैं।