फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: लोगों की आस्था का केंद्र है श्री वासुदेव तीर्थ स्थल

Mon, 28 Jul 2025 02:25 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। श्री वासुदेव तीर्थ शहर के लोगों के लिए ही नहीं वरन दूसरे प्रांतों के लोगों व सभी जाति, धर्म के लोगों का आकर्षण का केंद्र है। एक ओर जहां शिवालय पर दूर-दराज से लोग जलाभिषेक के लिए आते हैं तो वहीं मीरा बाबा की जात व गुरुद्वारे में गूंजती गुरुवाणी इसे खास बनाती है।
विज्ञापन




श्री वासुदेव मंदिर का इतिहास

श्री वासुदेव मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। इसका इतिहास लगभग 5,000 वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर महाभारत काल में पांडवों के अज्ञातवास का साक्षी रहा है। भगवान कृष्ण पांडवों के साथ यहां रुके थे और उन्होंने यहां के सरोवर में स्नान किया था। उन्होंने अपने हाथों से शिवलिंग की स्थापना भी की थी जो आज भी मंदिर में मौजूद है। यहां उन्होंने अपने हाथों से शिवलिंग की स्थापना कर उसका पूजन भी किया था। यहां से होते हुए श्रीकृष्ण रुक्मणी से विवाह के लिए संभल गए थे। इसका नाम श्री वासुदेव तीर्थ स्थल पड़ गया।





वासुदेव के दर से कभी कोई खाली हाथ नहीं जाता

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वासुदेव के दर से कभी कोई खाली हाथ नहीं जाता है। गंगा-जमुनी तहजीब का भी वाहक वासुदेव तीर्थस्थल गंगा-जमुनी तहजीब का भी वाहक है। यहां स्थित मीरा बाबा की ज्यारत पर मई-जून में दूर-दूर से हिंदू व मुस्लिम श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं। इसी तरह नवरात्र में होने वाले जगराते में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। इतना ही नहीं वासुदेव तीर्थस्थल परिसर में ही गुरुद्वारा भी स्थित है। इसके चलते यहां पर अलग-अलग धर्म व संप्रदाय के श्रद्धालुओं का आवागमन होता रहता है।
विज्ञापन




यह हैं आकर्षण के केंद्र

तीर्थस्थल ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवस्वरूप टंडन बताते हैं कि यहां पर करीब बीस बीघा भूमि पर प्राचीन तालाब है। इसमें लगे रंग-बिरंगी झरने जब चलते हैं। इससे श्रद्धालु व पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यहां 51 फीट ऊंची बजरंगबली की पंचमुखी विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। इसके साथ ही भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंग वाला मंदिर, भगवान परशुराम का मंदिर, राजा दक्ष का मंदिर, शनि देव मंदिर भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वासुदेव तीर्थ स्थल के चारों और प्राचीन कदम, वट और बरगद के वृक्ष भी आस्था का केंद्र हैं। करीब 200 बीघा में बना यह तीर्थ स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।





श्रद्धालुओं के लिए वासुदेव तीर्थस्थल अब और भी बना खास

दूर-दूराज रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए वासुदेव तीर्थस्थल अब और भी खास बन गया है। अब यहां आकर उन्हें ठहरने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर चार करोड़ की लागत से दो बड़े एसी हाल तैयार कराए गए हैं। इनमें एक साथ लगभग एक हजार श्रद्धालु रूक सकते हैं। इसके अलावा यहां पर सड़क, पार्क, लाइटिंग आदि की भी बेहतर व्यवस्था कराई गई है। इससे सुंदरता में चार चांद लग गए हैं। यहां हरियाली के लिए पौधरोपण भी कराया गया है। यहां पर शमी, कदम, पारिजात आदि के पौधे भी लगाए गए हैं जोकि लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें