ब्रीडिंग सीजन में कुत्ते ज्यादा खूंखार हो गए हैं। थोड़ा सा भी असुरक्षित महसूस करने पर कुत्ते लोगों पर तुुरंत हमला करके घायल कर रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना कुत्ते के शिकार तीस से चालीस मरीज पहुंच रहे हैं। लेकिन डाग बाइट के मरीजों को एआरवी नहीं लग रही है। अस्पताल में पिछले आठ दिनों से एआरवी खत्म हो गई है। रोजाना मरीजों को लौटाया जा रहा है। नतीजतन लोग बाहर से एआरवी लगवाने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल के अलावा नौगांवा सादात, धनौरा, रहरा और हसनपुर सीएचसी में एआरवी नहीं है।
साल में छह महीने कुत्तों का ब्रीडिंग सीजन होता है। ये अगस्त, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर के महीने हैं। इसके बाद फरवरी और मार्च कुत्तों के ब्रीडिंग का सीजन होता है। इन ब्रीडिंग सीजन में कुत्ते झुंड में अधिक दिखते हैं। एग्रेसिव भी अधिक होते हैं। वहीं ब्रीडिंग के सीजन में कुत्तों में इरीटेशन की शिकायत बढ़ जाती है। ब्रीडिंग के दौरान कुत्ते खूंखार हो जाते हैं। आने जाने वालों को काटने दौड़ते हैं। बड़े इनके गुस्से से बच जाते हैं, लेकिन बच्चे आसानी से इनके शिकार बन जाते हैं। यही वजह है कि इन दिनों डाग बाइट के केस बढ़ गए है।
जिला अस्पताल पर आठ अक्तूबर से एआरवी उपलब्ध नहीं है। कुत्तों के हमले में शिकार होने वाले रोजाना 30 से 40 लोग जिला अस्पताल पर एआरवी लगवाने आते हैं। लेकिन आठ दिन से एआरवी न होने के कारण लोग बाहर से लगवाने को मजबूर हैं। करीब 300 रुपये की एआरवी बाहर से खरीद पाना कुछ गरीबों की पहुंच से बाहर है।
इस वजह से लोगों पर हाइड्रोबिया का खतरा मंडरा रहा है। सीएमएस डॉ. रामनिवास ने कहा कि एआरवी की डिमांड भेजी गई है। सप्लाई न होने के कारण पिछले कई दिनों से एआरवी उपलब्ध नहीं हुआ है।