अमरोहा। जीवित महफूजा का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट पालिका प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
जांच के दौरान एक गवाह कमेटी के सामने नहीं आया, जबकि दूसरे गवाह ने अपने आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल का दावा किया है। वहीं संबंधित सभासद ने भी किसी प्रकार का प्रमाणपत्र या संस्तुति पत्र जारी करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने अपने लेटर हेड और मुहर का दुरुपयोग करने की बात कही है। जांच में नगर पालिका के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
चर्चा है जांच कमेटी ने मजिस्ट्रियल जांच कराए जाने की आवश्यकता बताई है। वहीं, पालिका प्रशासन ने मृत्यु प्रमाणपत्र शाखा में तैनात सुनील कुमार और मोहम्मद निजाम को पटल से हटा दिया है। चर्चा है कि जांच पूरी होने के बाद विवादित मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त किया जा सकता है।
मोहल्ला अहमदनगर निवासी महफूजा बेगम को मृत दर्शाकर न केवल मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, बल्कि इसके लिए तैयार किए गए दस्तावेजों में सभासद समेत चार लोगों को गवाह भी दिखाया गया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित सभासद और अन्य गवाहों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
जांच रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले हैं कि दस्तावेज तैयार कराने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में नगर पालिका के एक चर्चित कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध रही है।
मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए प्रस्तुत शपथ पत्र में महफूजा बेगम की मृत्यु 25 जुलाई 2024 दर्शाई गई थी। जबकि वास्तविकता यह है कि महफूजा बेगम ने चार फरवरी 2026 को नगर कोतवाली में अपनी जमीन के फर्जी बैनामे के मामले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद 26 फरवरी 2026 को नगर पालिका की जन्म-मृत्यु शाखा से उनके नाम का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में आबिद, जमीर अहमद और स्थानीय सभासद को गवाह दर्शाया गया था। वहीं हाशिम नामक व्यक्ति ने खुद को महफूजा बेगम का पुत्र बताते हुए शपथ पत्र दिया था। इस मामले में नगर कोतवाली में तैनात दरोगा पवन कुमार ने नगर पालिका से स्पष्टीकरण मांगा था।
इसके बाद तत्कालीन ईओ डॉ. बृजेश सिंह ने कर अधीक्षक केशव प्रसाद के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसमें लेखाकार मोहम्मद अजहर और सफाई एवं खाद्य निरीक्षक जगत सिंह को शामिल किया गया था। कर अधीक्षक व जांच कमेटी अध्यक्ष केशव प्रसाद ने कहा कि जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है।
जांच के दौरान एक गवाह सामने नहीं आया, जबकि दूसरे गवाह ने अपने आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल का दावा किया है। वहीं संबंधित वार्ड सदस्य ने भी किसी प्रकार का प्रमाण-पत्र या संस्तुति पत्र जारी करने से इनकार कर दिया है। मामले में नगर पालिका के तत्कालीन ईओ और एसडीएम कार्यालय के बीच पत्राचार भी हुए हैं। दोनों अधिकारी हमसे वरिष्ठ हैं, इसलिए पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच कराए जाने की आवश्यकता है, जिससे वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।