अमरोहा के गांव सैदनगली में लकड़ी की प्रतिमा तैयार करते शौकत अली।
- फोटो : amar ujala
भारत में हुनरमंदों की कमी नहीं हैं। ऐसा ही एक हुनरमंद अमरोहा के एक छोटे से गांव सैदनगली में रहता हैं। उसकी अंगुलियां जब लकड़ी पर चलतीं है तो लकड़ियां ‘जी’ उठती हैं। यह हुनरमंद ब्रिटेन की पूर्व महारानी एलिजाबेथ के अलावा भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का चेहरा भी लकड़ी पर उकेर चुका है।
अपनी हाथों की कलाकारी के बूते ही उसने देश के अलावा विदेशों तक में अलग पहचान बनाई है। बड़े एक्सपोर्टर्स की डिमांड को पूरा कर हाथों का यह हुनर विदेशी सरजमीं पर भी जलवा बिखेर रहा है।
हसनपुर ब्लाक क्षेत्र गांव सैदनगली निवासी 65 वर्षीय शौकत अली सैफी अब तक 1000 से अधिक मूर्तियां तैयार कर चुके हैं। इस हुनरमंद को दिल्ली, नोएडा, हैदराबाद, मुंबई चेन्नई सहित कई बड़े शहरों के एक्सपोर्टरों के जरिए देश ही नहीं विदेशों से आर्डर मिलते हैं। हाथों की कलाकारी विदेशी टूरिस्टों का ध्यान आकर्षित करती है।
कला प्रेमियों को उनका हुनर बांध लेता है। लकड़ी पर दस्तकारी करने की इस कला में वह इतने पारंगत हैं कि सामने कोई बैठ जाए, कुछ देर में ही लकड़ी पर उसकी शक्ल उकेर देते हैं। हिंदू देवी देवताओं की मूर्ति ही नही पत्थर पर जंगली जानवरों की तमाम मूर्तियां उनके द्वारा बनाई है। यदि लकड़ी के इन ताबूतों में भगवान जान डाल दे तो मानों वह बोल उठेंगी।