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तुर्कों ने जिपं सदस्य हाजी इफ्तिखार को घेरा, अपशब्द कहे

Tue, 29 Nov 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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Murder
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हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की मौत के बाद उसके समर्थकों कैबिनेट मंत्री महबूब अली के प्रति आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ऊपर से पुलिस ने हाईवे पर जाम लगाने के मामले में तुर्क समाज के 250 अज्ञात लोगों पर रिपोर्ट दर्ज उनके आक्रोश को आर बढ़ा दिया है।
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मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य हाजी इफ्तिखार का पाशा समर्थकों के इसी आक्रोश का सामना करना पड़ा। समर्थकों ने फत्तेपुर में जिपं सदस्य के वाहन को घेर लिया और जमकर अपशब्द कहे। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो उनके साथ खूब गाली गलौज की गई। उन्होंने किसी तरह माफी मांगकर अपनी जान बचाई। पाशा समर्थक हाजी इफ्तिखार के महबूब अली के मंच पर जाने से नाराज थे।

हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की शनिवार शाम मुरादाबाद के मैनाठेर थानाक्षेत्र में कैबिनेटमंत्री महबूब अली के दामाद के पेट्रोल पंप पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शौकत के परिजन कैबिनेट मंत्री और उनके रिश्तेदारों पर षड्यंत्र रचकर हत्या कराने का आरोप लगा रहे हैं।
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रविवार शाम शौकत के समर्थन में तुर्क समाज के हजारों लोगों ने हाईवे पर जमकर तांडव मचाया था। शव को रख हाईवे जाम कर दिया था और बसों में तोड़फोड़ आगजनी की थी। सभी कैबिनेट मंत्री की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी का मांग कर रहे थे। बाद में पुलिस की ओर से कैबिनेट मंत्री महबूब अली, उनके भाई महमूद अली उर्फ भूरा, दामाद गुलाम जिलानी और दो अन्य के खिलाफ तहरीर लेने पर जाम खोला था। 

पुलिस ने इस तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं की, उल्टे 250 अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज कर दी। इससे पाशा समर्थकों में आक्रोश और बढ़ गया है। सोमवार को अमरोहा में कैबिनेट महबूब अली की अध्यक्षता में श्रम विभाग की ओर से आयोजित साइकिल वितरण कार्यक्रम भाग लेना वार्ड 23 के जिला पंचायत सदस्य तुर्क समाज के हाजी इफ्तिखार को महंगा पड़ गया। टिकिया फत्तेपुर निवासी हाजी इफ्तिखार को फत्तेपुर माफी में शौकत समर्थकों ने घेर लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भड़के लोगों ने उनको जमकर अपशब्द कहे और महबूब अली के कार्यक्रम में जाने पर लताड़ लगाई। सूत्रों की माने तो उनके साथ गाली गलौज भी की गई। इससे हाजी इफ्तिखार भी सकते में आ गए। उन्होंने अपना को समाजवादी पार्टी में विधानसभा अध्यक्ष होने का हवाला दिया। कहा कि वो सपा के कार्यक्रम में भाग लेने गए थे। वो समाज के साथ हैं। इसके बाद भड़के लोगों ने उन्हें आगे जाने दिया।          

बताते चलें कि शौकत पाशा ने तुर्क बिरादरी में गहरी पैंठ बना ली थी। इसलिए हर कोई शख्स उसका मुरीद था। जुबां पर भले ही अपराध की चर्चा हो, मगर दिल में शौकत के लिए जगह थी। उसके नाम से ही गांव की आस पास के इलाके में पहचान थी। बिरादरी के लोगों के बीच सालों चल रहे विवाद पल भर में खत्म हो रहे थे। गरीब व मजदूरों के हकों का पक्षधर बन गया था। इसीलिए पूरी बिरादरी इस मसले पर एकजुट दिख रही है।
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