अमरोहा। सुरक्षा के दावों में कोई अफसर पीछे नहीं है। एक से बढ़कर एक निर्देश जारी करके हर आम और खास को यह अहसास कराया जाता है कि चप्पे-चप्पे पर पुलिस आपकी निगरानी और हिफाजत के लिए मुस्तैद है। पुलिस की मुस्तैदी का सच रविवार को सरेराह न्यायिककर्मी राशिद हुसैन की कार से खींचकर हत्या करने से ही सामने आ गया। मृतक के भतीजे सलमान ने बताया था कि हमलावरों ने आधा घंटे तक खुली गुंडई की। वारदात के प्रत्यक्षदर्शी रहे आसपास के लोगों ने घटना के बाद ही सवाल उठाया था कि उस दौरान पुलिस की कोई गाड़ी या बाइक भी आसपास से नहीं गुजरी। मदद को आए लोगों की सूचना पर 10 मिनट बाद पुलिस पहुंची थी।
सुरक्षा के दावों का सच सोमवार को दिन में सड़कों की पड़ताल में भी देखने को मिला। हमारी टीम ने मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र से हाईवे-घटनास्थल होते हुए अमरोहा तक का सफर किया। मझाेला थाना पार करने के बाद दिल्ली रोड पर पांच किलोमीटर के बाद जीरो पॉइंट पर तो ट्रैफिक और सिविल पुलिस वाहनों की चेकिंग करती मिली। इसके बाद करीब 15 किलोमीटर हाईवे या सर्विस रोड पर न तो पुलिस की पिकेट थी और न गश्ती वाहन।
अमरोहा जिले में दाखिल होने के बाद जिवाई चौकी के बाहर दो पुलिसकर्मी खड़े मिले। इसके आगे संभल चौराहे से बंबूगढ़ तक किसी भी स्थान पर न तो पुलिस पिकेट थी और न पुलिसकर्मी गश्त करते मिले। बंबूगढ़ बाईपास होते हुए जोया में संभल चौराहे तक जाने वाला रास्ता भी रामभरोसे था। यही वह इलाका है जहां रविवार दिनदहाड़े दुस्साहसी लोगों ने परिवार सहित कार से जा रहे न्यायिककर्मी को ड्राइविंग सीट से बाहर खींचकर बेरहमी से पीटा था। राशिद को बीबी-बच्चों, भतीजे सलमान के सामने तब तक मारते रहे थे, जब तक वह मरणासन्न स्थिति में नहीं पहुंच गए।
इतनी संगीन वारदात के दूसरे दिन भी घटनास्थल और आसपास पुलिस की चौकसी न देख हर राहगीर हैरान था। लोगों को उम्मीद थी कि सरेराह पीट-पीटकर हत्या के बाद दुस्साहसियों के बेखौफ अंदाज में लौट जाने के बाद कम से कम पुलिस के गश्ती दल प्रमुख सड़कों की खैर-खबर लेते रहेंगे लेकिन सोमवार को एेसा देखने को नहीं मिला।
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कैमरों की कमी भी अखरी
क्षेत्र के लोगों को रविवार की दुस्साहसिक वारदात के बाद से प्रमुख सड़कों पर दूर तक कोई कैमरा न होना भी अखर रहा है। तकनीक के इस दौर में जब पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी नजदीकी कैमरों, फोन लोकेशन-सीडीआर की मदद से बड़े अपराधियों के चेहरे बेनकाब करने में कामयाब हो जाती है, वहां प्रमुख सड़कों पर अब भी कैमरों की अनदेखी है। न्यायिककर्मी की सरेराह हत्या के घटनास्थल के आसपास या संभल चौराहे से बंबूगढ़ तक रोड के इर्दगिर्द कहीं भी सीसीटीवी कैमरे दिखाई नहीं दिए।
रात भर पड़ा रहा था घायल, नहीं मिली थी मदद, हो गई थी मौत
अमरोहा जिले में पिछले दिनों हुसैनपुर की पुलिया के पास रात के समय सड़क हादसे में युवक घायल हो गया था। घायल युवक रात पर पड़ा रहा था। पुलिस पिकेट या कोई सरकारी वाहन न गुजरने से उसे मदद नहीं मिल सकी थी। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई थी।
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