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सैलून-पार्लर बंद...चेहरे पर झलकने लगी उम्र

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अमरोहा। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन के 42 दिन से सैलून और पार्लर की दुकानें बंद पड़ीं हैं। इस कारण बाल और दाढ़ी बढ़ गई है। जो लोग बाल और दाढ़ी कटाकर खुद को युवा दिखाने की होड़ में लगे रहते थे। उनकी उम्र झलकने लगी है। बड़े बालों से बच्चे परेशान हो उठे हैं। ऐसे हालातों में कहीं घर की महिलाएं तो कही भाई दूसरों के बाल काट रहे है। कई तो खुद ही गंजे हो गए और बच्चों को बाल साफ कर दिए। सैलून की दुकान नहीं खुलने की वजह से लोग परेशान हैं। किसी के बाल बड़े हो गए हैं तो वहीं डाई न करने की वजह से लोगों की बाल सफेद होने लगे हैं। महिलाएं भी पार्लर बंद होने पर परेशान हैं।
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संक्रमण के डर से कटा लिए बाल
अमरोहा। लॉकडाउन के बीच कई लोगों ने परिवार के सदस्यों के बाल काटने शुरू कर दिए हैं। नगर के मोहल्ला कोट निवासी सुभाष चंद्रा ने अपने दोनों बेटे के बाल खुद ही काट दिए। जबकि मोहल्ला बटवाल निवासी सतेंद्र के बाल उनकी पत्नी ने चार दिन पहले काटे हैं। हालांकि परिवार के लोग बाल कटिंग के एक्सपर्ट तो नहीं हैं। लेकिन मकसद बाल छोटे रखने का था। जबकि मोहल्ला लकड़ा निवासी राजेश राणा पेशे से वकील है। लेकिन लॉकडाउन में सैलून बंद होने की वजह से बाल नहीं कटा सके। लिहाजा उनकी बाल और दाढ़ी बड़ी हो गई। उनका कहना है कि जब घर में बंद है तो क्यों न बाल और दाढ़ी बढ़ाकर चेहरे को नया लुक दिया जाए।
कई ग्रामीण और शहरी इलाकों पर घरों में जाकर बाल काट रहे
अमरोहा। लॉकडाउन के चलते ग्रामीण इलाकों को सख्ती थोड़ी कम होने के लिए सैलून की दुकान चलाने वाले कारीगर अपने खर्चा निकालने के लिए गांव-गांव जाकर बाल काट रहे हैं। कुछ कारीगर तो ऐसे है तो घर जाकर बाल काटने का डबल खर्चा ले रहे हैं। यही हालात शहरों के भी हैं। कुछ कारीगर अपने चुनिंदा ग्राहकों के घर जाकर बाल काट रहे हैं।
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10 हजार से अधिक कारीगरों की रोजी-रोटी का संकट
अमरोहा। लॉकडाउन घोषित हुए करीब 42 दिन बीत गए हैं। अभी दस दिन से अधिक का समय बाकी है। सैलून की दुकान संचालक और कारीगरों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। बताया जा रहा है करीब 10 हजार से अधिक लोग बाल कटिंग के पेशे से जुडे़े हैं। लॉकडाउन में सभी कारीगर घरों में कैद हैं। सैलून चलाने वाले इमरान ने बताया कि लॉकडाउन में आर्थिक संकट आ गया है। सरकार को सभी सैलून संचालकों को राहत देनी चाहिए।
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