रेलवे अंडरपास पर चार करोड़ रुपये खर्च कर रखे जा रहे रेस्ट्रिकट हाईट (आरएच) गर्डर ट्रेनों के लिए मुफीद साबित होंगे। अब ट्रैक या लाइन पर काम करने के लिए मेगा ब्लॉक लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दिल्ली-लखनऊ रेल मार्ग पर ट्रेनों को 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने की कई साल से कवायद चल रही है। इसके लिए ट्रैक को दुरुस्त किया जा रहा है। उधर, दिल्ली-लखनऊ रेलमार्ग पर बने फाटकों पर अंडरपास बनाए जा रहे हैं, जिसका काम करीब एक साल तक चलेगा।
रेलवे लाइन पर काम करते समय किसी कर्मचारी के साथ हादसा न हो, इसके लिए ब्लॉक लेना पड़ेगा, लेकिन मेगा ब्लॉक अर्थात पांच या छह घंटे का ब्लॉक लेने से बचने के लिए रेस्ट्रिकट हाईट (आरएच) गर्डर रखने का निर्णय लिया, जिनकी लंबाई 20.4 मीटर होगी। फिलहाल आरएच गर्डर रखने का काम फाटक 13 और 19 पर बनाए जा रहे अंडरपास पर किया जा रहा है। जिन पर चार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजिनियर (कार्य) नवीन पाल ने बताया कि दो अंडरपास पर कई दिन से आरएच गर्डर रखने का काम चल रहा है। जल्द पूरा होने पर अन्य अंडरपास पर किया जाएगा।