जिले में करीब साढ़े तीन लाख राशन कार्डों पर संकट मंडरा रहा है। इन पर छपी पूर्व सीएम अखिलेश यादव की तस्वीर से बखेड़ा खड़ा हो गया है। नई सरकार उनके कवर बदलवाएगी या फिर नए बनवाएगी, इसको लेकर अफसर असमंजस में पड़े हैं।
फिलहाल बनाए गए इन राशन कार्डों के वितरण पर अभी रोक लगी हुई है। लोग नगर पालिका व नगर पंचायत कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। अफसरों से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। इसका फायदा अगर किसी को मिल रहा है तो केवल राशन डीलरों को, क्योंकि उनके पास फर्जी कार्डधारकों का राशन भी पहुंच रहा है। जरूरतमंद दाने दाने को तरस रहे हैं।
सपा सरकार में जनपद भर में राशन कार्डों में बड़ा गड़बड़झाला उजागर हुआ था। इसमें हजारों कार्डधारक ऐसे थे जिनका कुछ अता पता नहीं था, जबकि उनके नाम से डीलर के पास बराबर राशन जा रहा था।
इस घपलेबाजी के उजागर होने के बाद पूर्ति विभाग ने दोबारा से पड़ताल कर राशन कार्ड बनाने का फैसला लिया था। शहर व ग्रामीण इलाके के 3 लाख 45 हजार 169 राशन कार्ड नए बनाए गए थे। जिन पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर छपी थी।
हैरत की बात ये है कि इन कार्डों का वितरण विभाग नहीं कर पाया। एक दिन पहले ही नगर पालिका व नगर पंचायतों के पास कार्ड भेजे गए। इसके अगले ही दिन आचार संहिता लग गई थी, जिसकी वजह से राशन नहीं बांटे जा सके थे। अब सत्ता परिवर्तन हो चुका है। भाजपा सरकार में पूर्व सीएम की तस्वीर वाले राशन कार्डों के वितरण पर रोक लगा दी गई है।
अब महकमे के अफसर गफलत में पड़ गए हैं कि कार्डों का कवर बदलेगा या पूरे कार्ड ही बदले जाएंगे। बहरहाल अभी अफसरों ने कोई निर्देश पास नहीं आने की बात कही है। कार्डों में गड़बड़झाले का दस्तूर पहले की तरह ही चल रहा है। इधर उधर के मोहल्ले में फिट किए गए उपभोक्ता राशन पाने को भटक रहे हैं, लेकिन निजात नहीं मिल पा रही है।
आंकड़ों पर गौर करें तो शहरों में अंतोदय कार्ड धारकों की संख्या 4630 है, जबकि बीपीएल कार्ड धारक 62270 हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कुल राशन कार्डों की संख्या 278269 है। लाभार्थी 1091360 हैं। इनमें अंतोदय कार्ड धारक 16113 व बीपीएल कार्डधारक 262156 हैं।