ढबारसी (अमरोहा)। दिल्ली की निर्भया के चार दरिंदों को शुक्रवार को फांसी दे दी गई। जिले की निर्भया के दरिंदे को कब फांसी मिलेगी, ये सवाल उठने लगा है। मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दरिंदे को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। सजा सुनाए पंद्रह साल हो गए लेेकिन अब तक दोषी को फांसी नहीं मिल सकी। दोषी आगरा जेल में बंद है।
आदमपुर थानाक्षेत्र में आठ अक्तूबर 2000 को दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। महज पौने नौ साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की गई और उसकी हत्या कर दी गई। 9 अक्तूबर 2000 को मासूम का शव एक कॉलेज के पीछे अरहर के खेत में मिला था। इस मामले में पुलिस ने दुष्कर्म-हत्या के आरोपी राजकुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपी के खून से सना नैकर और बनियान बरामद किया गया था। मुकदमे में मजबूत साक्ष्य के आधार पर जनपद न्यायाधीश ने 2005 में राजकुमार को फांसी की सजा सुनाई। 15 साल बाद भी कानूनी अड़चनों के चलते मासूम के दरिंदे को सजा नहीं मिली है। फांसी की सजा होने के बाद राजकुमार को मुरादाबाद से आगरा की जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।
काश! मेरी बेटी को निर्भया की तरह इंसाफ मिलता
अमरोहा। निर्भया के दरिंदों को फांसी पर लटकाए जाने के बाद जिले की निर्भया की मां को भी इंसाफ की उम्मीद जागी है। मासूम की मां का कहना है कि संसाधनों के अभाव और मेरे परिजनों को कानूनी समझ न होने के कारण आज तक न्याय नहीं मिल सका। मेरी बेटी की निर्दयता से हत्या करने वाला दरिंदा आज भी जिंदा है। जिसका मलाल मुझे मरते दम तक रहेगा।