फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रमजान का आगाज, आंख, हाथ और जुबान का भी है रोजा00

विज्ञापन
अमरोहा में चांद का दीदार करते बच्चे। - फोटो : JPNAGAR
विज्ञापन
अमरोहा। रहमत, मगफिरत और जहन्नुम से निजात का महीना रमजान शुरू हो गया है। बुधवार को पहला रोजा है। रमजान का हर लम्हा कीमती है। एक महीने तक अल्लाह अपने बंदों पर मेहरबान रहेंगे। उलमा ने रोजेदारों से रोजे का एहतराम करने की अपील की है। गलत कामों से बचने की ताकीद की है। उलमा ने कहा है कि रोजा केवल भूखे और प्यासे का नाम नहीं है बल्कि आंख से गलत नहीं देखें। हाथ से किसी को तकलीफ नहीं पहुंचाएं। जुबान से दूसरों की बुराई या गाली नहीं दें। शरीर के हर हिस्से का रोजा है। ऐसे में रोजेदार हर गलत काम से बचें। ताकि अल्लाह रोजे को कबूल कर सके। उलमा ने कहा है गर्मी का समय है। ऐसे में सेहत का ख्याल रखें। उलेमा ने कहा कि पहला असरा रहमत है। रमजान की रातों में इबादत करें।
विज्ञापन

मगरिब की अजान के साथ रमजान मुबारक
अमरोहा। मंगलवार को मगरिब की अजान फिजा में गूंजी तो लोग मस्जिदों में गए। उन्होंने नमाज अदा की। इसके बाद रमजान मुबारक बोले। व्हाट्सएप, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बधाई का सिलसिला शुरू हुआ। बच्चों ने आतिशबाजी कर रमजान की खुशियों को साझा किया।
ईशा की नमाज अव्वल वक्त में अदा करें
अमरोहा। जामा मस्जिद इंतजामिया ने शहर के मस्जिदों के उलमा से अपील की है कि ईशा की नमाज को अव्वल वक्त में अदा करें। इसके चलते मस्जिदों और घरों में रात 8.15 बजे से ईशा की नमाज का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन

रमजान का रोजा शुरू हो गया है। यह अफजल महीना है। रोजा रखें। समय से नमाज पढ़ें। सहरी के बाद छोटी इलायची खाएं। प्यास की शिद्दत महसूस नहीं करेंगे। जकात और खुम्स जरूर निकालें। दूसरों का ख्याल रखें। किसी का दिल नहीं दुखाएं।
डॉ. एमएस नकवी, शिया शहर इमाम।
रमजान उल मुबारक इबादत और नेकियां जमा करने का मौका है। रोजा रखने के साथ तिलावत कुरआन, तस्बीह और तहलीम की कसरत करे। रमजान में ईशा की नमाज के बाद तरावीह पढ़ी जाए। दूसरों का ख्याल रखें। आंख, हाथ और जुबान का भी रोजा है। गलत नहीं देखें। किसी को तकलीफ नहीं पहुंचाएं।
विज्ञापन

मुफ्ती तौहीद रजा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें