मंडी धनौरा। बीते कुछ दिन से हो रही बारिश भले ही गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हो रही हो लेकिन इस बारिश ने आलू उत्पादकों की नींद उड़ा दी है। बारिश से आलू की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका सता रही है। आलू उत्पादकों का कहना है कि इस बारिश से आलू में गलन रोग लगना शुरू हो गया है।
क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है। इनमें मोहम्मदपुर पट्टी, मिलक, कैसरा, नादनौर, धनौरी खुर्द, सुनगढ़, रामपुर तगा, रमपुरा, दिसौरा, मिठ्ठनपुर, डींगरा, कंजरबसेड़ा, मुसल्लेपुर, कमालपुर, शाहबाजपुर, मोहनपुर, नसीरपुर, इंदरपुर, लालापुरी, खाबड़ी, आजमपुर, आशिकपुरा, प्रेमनगर, दांडी, मढै़या, शाहपुर, मलकपुर, बिहापुरी आदि गांव शामिल हैं। इस साल आलू की फसल पहले से ही घाटे का सौदा बन चुकी है।
बाहर की मंडियों में दूसरे प्रांतों का आलू आने से यहां के आलू की मांग काफी कम हो गई। इसका खामियाजा स्थानीय आलू उत्पादकों को उठाना पड़ रहा है। पिछले साल का कोल्ड स्टोरेज में रखा आलू भी सही दाम नहीं मिलने के कारण गल गया। किसानों ने आलू को कोल्ड स्टोरेज से बाहर हीं नहीं निकाला था।
प्रेमनगर निवासी आलू उत्पादक मायाराम सैनी का कहना है कि बाजार में आलू की कीमत थोक में 300 रुपये बोरा है। एक बीघा आलू की खेती में करीब आठ से 10 हजार रुपये की लागत आती है। जबकि एक बीघा में पैदावार की कीमत मात्र पांच हजार रुपये मिल रही है। आलू की खेती घाटे का सौदा बन चुकी है। बीते कुछ दिन से हुई बारिश से आलू की फसल में गलन रोग लगना शुरू हो गया है। आलू की फसल को बचाने के लिए दवा का छिड़काव किया जा रहा है।
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ग्राम आजमपुर निवासी देवराज सैनी का कहना है कि बारिश ने उनकी कमर तोड़ दी है। कर्जा लेकर आलू की फसल लगाई थी। लेकिन बारिश से आलू में रोग लग गया है। आलू की पैदावार किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। सरकार से आलू उत्पादकों के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल रही है।
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ग्राम शाहबाजपुर गुर्जर निवासी राकेश कुमार का कहना है कि जनवरी के आखिरी दिनों में हुई बारिश से आलू की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। सरकार छोटे किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए कोई कदम नहीं उठाती है। उन्होंने आलू की सरकारी खरीद की जरूरत बताई।