सर्दी शवाब पर है, मगर अमरोहा आने वाले मुसाफिरों की किसी को फिक्र नहीं है। जरूरतमंदों के नाम पर नगर पालिका की ओर से बनवाए गए रैन बसेरे में ताला लगा हुआ है तो रेलवे ने अभी तक रैन बसेरा बनाने की जहमत तक नहीं उठाई। इससे दूर-दराज से कामकाज के सिलसिले में आए मजदूर, रिक्शा चालक और अन्य जरूरतमंद प्लेटफार्म-सड़कों के किनारे ठिठुरने के लिए मजबूर हैं। वहीं निर्धारित जगहों पर अलाव भी नहीं जल रहे हैं।
बता दें कि जिले में आठ स्थानों पर रैन बसेरे की व्यवस्था करने और 95 स्थानों पर अलाव जलाने के निर्देश संबंधित नगर पालिका और नगर पंचायत के ईओ को दिए गए थे। अलाव के लिए लकड़ी आदि की व्यवस्था के लिए तीनों तहसीलों को पचास-पचास हजार की धनराशि दी गई थी।
अमरोहा शहर में कहने को तो दो स्थानों पर रैन बसेरे बन गए हैं, मगर पड़ताल में इसकी सच्चाई सामने आ गई। अमरोहा नगर पालिका में बनाए गए रैन बसेरे पर रात्रि में ताला लटका मिला। वहां न तो कोई चौकीदार था, न कोई अन्य व्यक्ति वहां मौजूद मिला।
एक दो मुसाफिर वहां ठहरने के लिए पहुंचे तो रैन बसेरे पर ताला लटका देखकर ही वापस लौट गए। जब रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो वहां रैन बसेरा मिला ही नहीं। लोग टिकट काउंटर वाले हाल में ही सोते नजर आए। रात्रि में अलाव भी सभी चिंह्नित स्थानों पर नहीं जलाए जा रहे हैं।
अपर जिलाधिकारी महमूद आलम अंसारी ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है, अमरोहा नगर पालिका के ईओ का स्पष्टीकरण तलब किया गया है। रैन बसेरे पर ताला क्यों लटका हुआ है, आदेश के बावजूद रैन बसेरे की सभी व्यवस्थाओं को पूर्ण किया नहीं किया गया है। सभी ईओ से अलाव और रैन बसेरे के संबंध में प्रतिदिन रिपोर्ट मांगी गई है।