कोतवाली क्षेत्र के गांव शेरगढ़ में कोर्ट के आदेश पर चकबंदी कराने पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को ग्रामीणों ने घेर लिया। महिलाएं भी लाठी-डंडे लेकर मैदान में उतर आईं। ग्रामीणों से अधिकारियों की जमकर नोकझोंक हुई। बाद में ग्रामीण हसनपुर-कटाई मार्ग पर धरने पर बैठ गए। चकबंदी नहीं कराने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की गई।
ग्रामीणों का उग्र रूप देख पुलिस-प्रशासन का भी पसीना निकल आया। उनको पैर पीछे खींचने पड़े। फिलहाल टीम ग्रामीणों को अल्टीमेटम देकर वापस लौट आई। ग्रामीणों से पांच दिन में कोर्ट से चकबंदी नहीं कराने का आदेश लाने को कहा है।
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हसनपुर ब्लाक क्षेत्र के गांव शेरगढ़ में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के 80 फीसदी किसान चकबंदी नहीं कराना चाहते हैं। आरोप है कि गांव के कुछ दबंग लोग अपने फायदे के लिए चकबंदी कराना चाहते हैं। इसकी कई बार प्रशासनिक और चकबंदी अधिकारियों से शिकायत भी की जा चुकी है। मामला कोर्ट में हैं। ग्रामीणों ने चकबंदी अधिकारी पर भी दबंगों से हमसाज होने का आरोप लगाया है। इस बीच एक पक्ष गांव में चकबंदी कराने के लिए कोर्ट से आदेश लेकर आ गया। आदेश मिलने के बाद एसडीएम अशोक मौर्य ने नायब तहसीलदार देवेंद्र सिंह, कोतवाल अनिल समानिया के नेतृत्व में आदमपुर और रजबपुर थाने की फोर्स और पीएसी को गांव भेजकर चकबंदी कराने के निर्देश दिए।
सोमवार सुबह 11 बजे भारी पुलिस फोर्स के साथ नायब तहसीलदार गांव पहुंच गए। चकबंदी की सूचना मिलते ही महिलाएं हाथों में लाठी-डंडे लेकर घरों से बाहर आ गईं। चकबंदी नहीं करने की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। नायब तहसीलदार देवेंद्र सिंह और कोतवाल अनिल समानिया ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण चकबंदी नहीं करने की जिद पर अड़े रहे। अधिकारियों को ग्रामीणों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। ग्रामीण हसनपुर-कटाई मार्ग पर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का उग्र रूप देख पुलिस-प्रशासन का भी पसीना निकल आया। उनको पैर पीछे खींचने पड़े। फिलहाल टीम ग्रामीणों को अल्टीमेटम देकर वापस लौट आई। ग्रामीणों से पांच दिन में कोर्ट से चकबंदी नहीं कराने का आदेश लाने को कहा गया है।