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बंदी को लेकर सड़क पर उतरे किसान, 40 लिए गए हिरासत, रिहा

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अमरोहा में गिरफ्तारी के बाद देहात थाने में बैठे कांग्रेसी। - फोटो : JPNAGAR
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अमरोहा। कृषि कानूनों के वापसी की मांग को लेकर किसानों के विभिन्न संगठन मंगलवार को सड़क पर उतर आए। वहीं, कांग्रेसी नेता पुलिस को चकमा देकर मंगलवार को कलक्ट्रेट में धरना देने पहुंच गए। हालांकि पुलिस ने उन्हें गेट पर पहुंचने के पहले ही हिरासत में ले लिया। पुलिस इन्हें देहात थाना ले आई जहां देर शाम सभी को रिहा कर दिया गया।
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किसानों के विभिन्न संगठनों ने कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर मंगलवार को भारत बंद का एलान किया था। इसे लेकर पुलिस व प्रशासनिक अमला पूरी तरह सतर्क रहा। कांग्रेसियों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन का एलान किया था। इसे लेकर पुलिस सजग हो गई। कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता अलग-अलग बाइकों से कलक्ट्रेट पहुंचे। पुलिस ने इन लोगों को गेट के पहले ही रोक लिया। कांग्रेसी नेता कलक्ट्रेट के अंदर जाने की जिद करने लगे। इस पर पुलिस ने कांग्रेसियों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद इन लोगों को बस से देहात थाने लाया गया। हिरासत में लिए गए लोगाें में कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार कटारिया, शहर अध्यक्ष परवेज आरिफ टीटू, सुखराज सिंह, हाजी खुर्शीद अनवर, अली इमाम रिजवी, फैज आलम राइनी, सलीम खान, जयपाल सिंह, विनोद सक्सेना, मेराजुल जफर, ओमप्रकाश पंवार, वाहिद सैफी, हरिओम पुष्कर, साजिद चौधरी, जीशान तुर्क, मंसूर सलमानी, चनन खान, इकबाल अंसारी, शाहिद उस्मानी, मोहसीन अली, अशोक वर्मा, इमरान आब्दी, वजीर अस्करी, इमरान जावेद, अली हैदर, नकुल पंवार, खुर्रम चौधरी, इमरान हाशमी, मयंक गुर्जर, डॉ. मुजाहिद खान आदि शामिल रहे। कांग्रेसियों ने यहां जमकर नारेबाजी की। देर शाम इन्हें रिहा कर दिया गया।
उधर, जोया में कांग्रेस के प्रदेश सचिव सचिन चौधरी मंगलवार को दोपहर लगभग 12 बजे डिडौली से आगे बढ़ गए। बढ़े पुलिस ने इन्हें हाईवे पर हिरासत में ले लिया। वह टोल प्लाजा के पास किसानों के आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस उन्हें डिडौली कोतवाली ले आई।
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समर्थन मूल्य जरूरी, किसान आयोग और आरक्षण दे सरकार
अमरोहा। भाकियू लोक शक्ति ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। कलक्ट्रेट में संगठन के लोगों ने नारेबाजी की। किसान आयोग के गठन की मांग दोहराई। पीएम नरेंद्र मोदी को संबोधित पत्रक एडीएम वित्त और राजस्व विनय कुमार सिंह को दिया। जिलाध्यक्ष हसीन अहमद गफ्फारी की अगुवाई में संगठन के लोगों ने दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों को आरक्षण की मांग की। उनका कहना था कि किसानों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा हासिल कर सके, इसकी व्यवस्था की जाए। इसके अलावा नौकरियों में भागीदारी बढ़े।
किसानों के साथ जिले के किसान और आम लोग : महबूब
अमरोहा। लोक लेखा समिति के सभापति/विधायक महबूब अली ने किसानों के आंदोलन को जरूरी बताया। कहा कि जिले के किसानों ने देश के किसानों के साथ शामिल होकर बेहतर काम किया है। भारत बंद का असर देखने को मिला है। इससे साबित होता है कि कृषि कानून किसानों के खिलाफ है। स्वत: स्फूर्त बंद सरकार के लिए खतरे का संकेत है। समाजवादी पार्टी मांग करती है कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए ताकि किसानों की चिंता खत्म हो सके।
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