अमरोहा। मौला-ए-कायनात हजरत अली के यौमे विलादत पर शनिवार को शहर में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित हुए। शिविर लगाकर कहीं लंगर बांटा गया तो कहीं सबील का आयोजन कर राहगीरों को चाय पिलाई गई।
सुबह से ही घरों में शुरू हुआ नजर-ओ-नियाज का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इमामबाड़ों को सजाकर मौला अली की विलादत का जश्न पूरे जोश के साथ मनाया गया। कई स्थानों पर सजी महफिलों में उलेमाओं और शायरों ने दामाद-ए-रसूल से जुड़े जंग के वाक्यात और बहादुरी के किस्सों का जिक्र किया।
अंजुमने रजाकाराने हुसैनी की ओर से कोट चौराहे पर कैंप का आयोजन किया गया। अंजुमन पदाधिकारियों ने राहगीरों के बीच हलवा वितरित किया। वक्ताओं ने हजरत अली की जिंदगी पर रोशनी डाली। कार्यक्रम की शुरुआत में शिया जामा मस्जिद के इमाम जुमा मौलाना सरोश नकवी ने हलवे पर नजर (तबर्रुक) की। इसके बाद अंजुमन पदाधिकारियों ने अस्पताल जाकर मरीजों के बीच फल वितरित किए।
शहर के मेराज मंजिल में महफिल-ए-समां का आयोजन देर रात हुआ। जिसमें फिरोजाबाद से आए हुए अनस चिश्ती साबरी ने हजरत अली की शान में कलाम पेश किया। महफिल में मीर नजीर बाकरी, डॉ.नसीम उज जफर संभली और नामचीन शायरों ने अपना कलाम पेश किया। शहर के मोहल्ला मजापोता, दरबार शाह विलायत, बाजार गुजरी, हक्कानी व मंडी चौब आदि व अन्य स्थानों पर भी लंगर का आयोजन दिन भर जारी रहा।