श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल चोटीपुरा में आचार्या सुमेधा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित शास्त्रीय प्रतिस्पर्धाओं की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुई। आचार्या डॉ. सुमेधा ने कहा कि हमारी संस्कृति का संरक्षण संस्कृत द्वारा ही हो सकता है।
महर्षि दयानंद सरस्वती ने मानव जाति के उत्थान के लिए अथाह प्रयास किए। संस्कृत और संस्कृति के संरक्षण के लिए गुरुकुल की स्थापना की। इसी क्रम में कन्या गुरुकुल चोटीपुरा की स्थापना की गई है। हमें अध्ययन के स्तर के साथ शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन की त्रिवेणी को लेकर चलना है। डॉ. विनय कुमार विद्यालंकार ने कहा कि हमारी संस्कृति विश्व की प्रथम संस्कृति है। उस संस्कृति का संरक्षण गुरुकुलों में किया जाता है। मनुष्य की निर्माणशाला भी गुरुकुल ही है। यहां एकांगी जीवन नहीं अपितु सर्वांगीण जीवन का निर्माण होता है।
जेएनयू के प्रोफेसर डॉ. सुधीर ने कहा कि ऋषि दयानंद का चिंतन अनूठा है। इसके साथ ही विभिन्न शास्त्र स्पर्धाओं का प्रारंभ हो गया। इसमें बड़ी संख्या में छात्राओं ने शास्त्रों को उत्तम रीति से प्रस्तुत किया। एक जनवरी को समापन समारोह में विजेता छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। मंगलवार को शास्त्रीय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य बालकृष्ण (पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार) एवं एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केपी सिंह रहेंगे। साथ ही उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश चंद्र, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार आरजी मुरलीकृष्णन एवं डीन मदन मोहन झा मौजूद रहेंगे।