मंगलवार को महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा करने के बाद कच्चा सूत से फेरी दी। इसके बाद वट सावित्री की कथा सुनी। माना जाता है कि इस दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण बचाए थे, तभी से यह व्रत चलता आ रहा है। यह व्रत पति के दीर्घायु के अलावा संतान प्राप्ति के लिए भी रखा जाता है। नीता माहेश्वरी ने कहा कि आज के दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति के लिए कठिन तपस्या कर अपने पति सत्यवान का प्राण वापस लाई थी। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष की पूजा अर्चना करती हैं।
मेधा माहेश्वरी ने कहा कि सावित्री ने यमराज से लड़कर अपने कठिन तपस्या से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाई थी। इसी प्रेरणा से वट सावित्री व्रत रखा जाता है। पूनम खटोड़ ने कहा कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने से महिलाओं के सुखद वैवाहिक जीवन की इच्छाएं पूरी होती हैं। वैवाहिक जीवन में आने वाली किसी भी प्रकार की कठिनाई या रुकावट समाप्त हो जाती है।