ग्राम पंचायत के कार्यों के साथ अब जनपद में प्रधानों को नई जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। ये कोई और नहीं बल्कि पानी के हिसाब की है। जिसका लेखा-जोखा उनके पास रहेगा। ग्रामीणों से कर वसूलने का भी काम वही करेंगे। जी हां, इसके लिए जल निगम ने ग्रामीणों को पेयजलापूर्ति के लिए बनाई गईं पानी की 15 टंकियां प्रधानों को हैंडओवर कर दी हैं।
जनपद के तमाम गांवों का पानी पीने योग्य नहीं है। जरा सी देर रखने पर ही पीला हो जाता है। बीमारियां लोगों को चपेट में ले रहीं हैं। कई बार पानी के सैंपल भरे गए हैं। ग्रामीणों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने पांच व दस हजार की आबादी वाले गांवों में टंकियां लगाने का फैसला किया था।
इसके लिए 15 गांव चिह्नित किए थे। शासन ने जिला प्रशासन के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया था। बीस करोड़ से अधिक की धनराशि उपलब्ध करा दी थी, जिससे जल निगम ने गांव में टंकियां बनाईं हैं। छह माह तक उसने ट्रायल पर चलाया है। सबकुछ सही होने पर ग्राम पंचायतों के सुपुर्द कर दी हैं।
इन गांवों में बनीं टंकियां
पतेई खालसा, बदौनिया, कूबी, जेबड़ा, मेहरपुर गुर्जर, ढक्का, शाहपुर, सुल्तानपुर, पतेई खादर, कुंदैनी, दरियापुर बुजुर्ग, वसैली, चौबारा, सरकड़ी अजीज।
ग्रामीण नहीं ले रहे दिलचस्पी
पेयजलापूर्ति के लिए करोड़ों रुपये की टंकी बनाकर विभाग ने प्रधानों को सौंप दी हैं, मगर उनका कनेक्शन लेने में ग्रामीण दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। सभी गांवों में यही हालात हैं। प्रधान कनेक्शन करने को कहते हैं, किन्तु कोई भी ग्रामीण ध्यान नहीं देता।
टंकियां टेस्टिंग के बाद ग्राम पंचायतों को दे दी हैं। प्रधान उनकी देखरेख करेंगे। पानी की सप्लाई घरों तक पहुंचाएंगे। कम से कम 50 रुपये चार्ज निर्धारित करने को कहा गया है। इससे ज्यादा भी वह फिक्स कर सकते हैं। ट्यूबवेल की मरम्मत, घर तक टंकी का पानी पहुंचाने, ऑपरेटर रखने व बिजली बिल भरने तक का कार्य प्रधान ही करेंगे।- एसके जैन, एक्सईएन जल निगम