गजरौला (अमरोहा)। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने गैस रिसाव होने के मामले में बेस्ट क्रॉप साइंस लिमिटेड फैक्टरी को बंद करा दिया है। यह कार्रवाई नायब तहसीलदार, एसडीओ बिजली व पुलिस की मौजूदगी में की गई। बिजली विभाग ने फैक्टरी की आपूर्ति ठप कर दी। इसके बाद फैक्टरी प्रबंधन ने 500 कर्मचारियों के आने पर रोक लगा दी है। 23 सितंबर को फैक्टरी से जहरीले गैस का रिसाव हो गया था जिससे करीब पांच घंटे तक शहर के लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ा था।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उमेश कुमार शुक्ला ने बताया कि शुक्रवार को सहायक पर्यावरण अभियंता माहिर हुसैन, वैज्ञानिक सहायक सुरेश चंद्र त्रिपाठी गजरौला भेजे गए। उन्होंने नायब तहसीलदार, बिजली विभाग के एसडीओ और पुलिस के साथ औद्योगिक क्षेत्र में स्थित बेस्ट क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड फैक्टरी में की कार्रवाई की उसके रिएक्टर बंद कराए। बिजली विभाग की टीम ने फैक्टरी की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। नायब तहसीलदार ने फैक्टरी पर सील लगा दी।
उमेश शुक्ला ने बताया कि फैक्टरी प्रबंधन ने ही लिखकर दिया था कि सभी रिएक्टर में रिएक्शन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। फैक्टरी में जो कमियां पाई गई थीं उनको जल्द दूर करने का आश्वासन दिया है।
फैक्टरी प्रबंधन ने 500 कर्मियों के आने पर लगाई रोक
बेस्ट क्रॉप साइंस लिमिटेड फैक्टरी में 200 स्थायी समेत 700 कर्मचारी कार्यरत थे। पांच सौ कर्मचारी ठेकेदार के अधीन काम करते थे। फैक्टरी प्रबंधन ने कुछ समय पहले रिएक्टर बंद किए जाने पर सवाल उठाए थे। कहा था कि रिसाव वेयर हाउस में हुआ था और कार्रवाई प्लांट पर की गई। फैक्टरी के प्रशासनिक अधिकारी सुबोध कुमार गुप्ता ने दो दिन पहले इस संबंध में प्रेसवार्ता भी की थी। उन्होंने प्रशासनिक अफसरों से गुहार लगाई थी कि फैक्टरी को बंद कर न दी जाए। अन्यथा 700 लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा था कि फैक्टरी में ठेकेदार के अधीन काम करने वाले 500 कर्मचारियों को बाहर करने का नोटिस भी दिया जा चुका है। मगर शासन और जिला प्रशासन से कोई रियायत न मिलती देख बृहस्पतिवार को कर्मचारियों को बता भी दिया कि उनको रोका जा रहा है। शुक्रवार सभी को रोक दिया गया। इस कारण वह त्योहारी सीजन में बेरोजगार हो गए हैं।
करीब पांच घंटे रहा था अफरा-तफरी का माहौल
23 सितंबर की रात करीब आठ बजे फैक्टरी के वेयर हाउस से जहरीली गैस का रिसाव हो गया था जिससे गजरौला सहित आसपास के कई गांवों में अफरा-तफरी मच गई। धुंध और गैस से लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन होने लगी थी। नोएडा से आई एनडीआरएफ की टीम ने करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद हालात काबू में किए जिसके बाद लोगों को राहत मिली थी।
फैक्टरी में बनाई जाती थी कीटनाशक दवाइयां
रेलवे लाइन किनारे स्थित फैक्टरी में खेती में इस्तेमाल किए जाने वाली कीटनाशक दवाइयां बनाई जाती हैं। वेयर हाउस में 23 सितंबर की रात करीब 50 टन कच्चा माल रखा था जिससे पेस्टीसाइड बनाया जाता है। फैक्टरी के प्रशासनिक अधिकारी सुबोध कुमार गुप्ता ने बताया कि वेयर हाउस में रखे कच्चे माल में सीओ-2 व एनओ-2 का एक दूसरे के संपर्क में आ जाने के कारण रात करीब आठ बजे धुआं उठने लगा था जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
क्रेन से तोड़ा गया था वेयर हाउस
फैक्टरी का वेयर हाउस कच्चे माल से भरा था जिससे जहरीली गैस का रिसाव होने से फैक्टरी में काम करने वाले कर्मचारियों की भी हालत बिगड़ने लगी। इस बीच नगर के लोगों की हालत खतरे में देख एडीएम व एसडीएम ने गैस रिसाव का ठिकाना वेयर हाउस को तोड़ने के निर्देश दिए। जिस पर क्रेन से वेयर हाउस तोड़ा गया था। तब जाकर कुछ हालात सामान्य हुए। 24 सितंबर की दोपहर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने फैक्टरी का निरीक्षण किया था गैस रिसाव के कारणों की जानकारी ली थी।