अमरोहा के संभल चौराहा हाईवे पर जाम लगाकर आगजनी करते लोग।
- फोटो : मो. फहीम
भाई की पत्नी की जिला पंचायत सदस्य उपचुनाव में करारी हार के बाद कैबिनेट मंत्री का किला यूं तो दरकने लगा था, लेकिन उसके गम को भुलाकर फिर से मंत्री वोटरों को साधने का जतन कर रहे थे। तुर्क बिरादरी में अपनी अलग छाप रखने वाले मंत्री को अब उसके गुस्से का सामना करना पड़ेगा। शौकत की मौत के बाद बिरादरी एक प्लेटफार्म पर आ गई है। आगामी विधानसभा चुनाव में बिरादरी की एकजुटता समीकरण बदल सकती है।
अमरोहा विधानसभा क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक गांव तुर्क बहुल हैं, जिसमें कैबिनेट मंत्री महबूब अली अपनी अलग पहचान रखते हैं। पूरी बिरादरी उनके पक्ष में रहती है, लेकिन शौकत पाशा की हत्या ने सबको हिला दिया है। बिरादरी के जो लोग अलग थलग थे, वह एकजुट हो गए हैं। प्रत्येक की जुबां पर महबूब अली, उसके भाई महमूद अली भूरा, एमएलसी बेटे परवेज अली के प्रति गुस्सा है।
जहां आक्रोशित लोग मंत्री को पद से बर्खास्त कर उन पर एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे, वहीं बिरादरी का कोई भी व्यक्ति उनके पक्ष में नहीं दिख रहा था। हरेक कह रहा था कि प्री प्लान ये मर्डर हुआ है। यहां बता दें कि पूरे अमरोहा विस क्षेत्र में तुर्क बिरादरी के करीब 35 से 40 हजार के बीच में वोटर हैं। कैबिनेट मंत्री इन पर डोरे डालकर अपना वर्चस्व कायम किए हुए थे, लेकिन रविवार को जो नजारा फतेहपुर माफी गांव में देखने मिला, वह वाकई चौंकाने वाला था।
यहां पूरी बिरादरी शौकत के परिवार के पक्ष में थी और मंत्री के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा रही थी। हत्या का आरोप लगा रही थी। उसके गुस्से को देखकर लग रहा था कि इस बार मंत्री की चुनावी डगर आसान नहीं होगी। जिसके पक्ष में बिरादरी होगी, वही विधायकी चुनाव फतह करेगा। बताते चलें कि जिला पंचायत उपसदस्य चुनाव में मंत्री के भाई महमूद अली उर्फ भूरा की पत्नी फात्मा बेगम हार गई थीं। ताज्जुब इस बात का था कि जहां से वह चुनाव लड़ी थीं, वह कैबिनेट मंत्री का गढ़ था। इस हार के बाद मंत्री ने दोबारा से गढ़ को मजबूत करना चालू किया था।