जिला पंचायत सदस्य का उप चुनाव जीतने पर विक्ट्री बनाकर खुशी मनाती सुबूर चौधरी।
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सियासत का अपना उसूल होता है। अगर किसी को हराना है तो उसके किले में सेंधमारी करनी पड़ेगी। यह काम कोई अकेला नहीं कर सकता, लेकिन जुगलबंदी हो जाए तो कामयाबी भी मिल जाए। ठीक यही स्थिति जिला पंचायत सदस्य उप चुनाव में देखने को मिली। सियासतदाओं ने ऐसी जुगलबंदी भिड़ाई कि वोटरों में सेंध पर सेंध लगती चली गई। अन्य बहुसंख्यक मतदाता भी एकजुट होकर सुबूर चौधरी के पक्ष में आ गए और उनको भारी मतों से विजयी बना दिया।
यूं तो शुरू से ही जिला पंचायत सदस्य उप चुनाव को लेकर सपा नेता दो धड़ों में बंट गए थे। फात्मा बेगम पक्ष की ओर से जहां कैबिनेट मंत्री महबूब अली चुनाव लड़ा रहे थे, वहीं दूसरी ओर सुबूर चौधरी को कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर सपोर्ट कर रहे थे। दोनों मंत्रियों के लिए यह चुनाव मूंछ का सवाल बन गया था। मतदाताओं को रिझाने के लिए कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर के साथ विधायक अशफाक अली व पूर्व मंत्री चौधरी चंद्रपाल सिंह एक मंच पर आ गए।
उन्होंने गांव-गांव जाकर संपर्क किया और बहुसंख्यक वोटरों पर डोरे डाले। वहीं कैबिनेट मंत्री महबूब अली व उनके बेटे ने भी चुनाव में पुरजोर ताकत लगाई, लेकिन चुनाव में सिर्फ और सिर्फ कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर की जुगलबंदी काम आई।
इस जुगलबंदी की बदौलत सुबूर को हर बिरादरी का वोट मिला। अन्य पार्टी के वोटरों को रिझाने में उनको सफलता मिलती चली गई। नतीजतन मंगलवार को हुई मतगणना में सुबूर चौधरी ने फात्मा बेगम को हराकर जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। हालांकि शुरूआत से ही सुबूर की जीत का अनुमान लोग लगा रहे थे। मतगणना के दौरान वह सच साबित हो गया।
मैं सपा से चुनाव लड़ रही थी, लेकिन पार्टी के ही कुछ लोग विरोध में आ गए। मुझको हराने के लिए हर पार्टी के कार्यकर्ता मिल गए। एक ही पक्ष के फेवर में मतदान किया। लेकिन मैं अपने उन समर्थकों की आभारी हूं, जिन्होंने मुझे वोट दिया। मैं हारी नहीं हूं बल्कि मुझको काफी खुशी है कि इतने वोट मिले। अगर कई लोग मिल जाएं तो किसी को भी हरा सकते हैं। ऐसा ही मेरे साथ हुआ है। हर पार्टी के लोग एक होकर उनके विरोध खड़े थे। फात्मा अली, पराजित प्रत्याशी