यूं तो पुलिस लोगों के उत्पीड़न के लिए हमेशा बदनाम रहती है। लेकिन इस सब के बीच एक ऐसा सिपाही भी है जो अपने खून से दूसरों की जिंदगी सींचता हैं। किसी को खून की जरूरत है... बस उन्हें पता चलने की देर है। निकल पड़ते हैं उसकी मदद करने के लिए। यातायात पुलिस का ये सिपाही अपने जीवन के कर्तव्यों को निभाकर सभी के लिए मिसाल पेश कर रहा है।
बिजनौर जनपद के सड्डियापुर गांव निवासी स्व.तेजपाल सिंह के बेटे अवनीश कुमार को उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी मिली। इसके बाद वो यातायात पुलिस में आ गए। अवनीश की पत्नी रितु चौधरी भी उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल हैं। उनकी इस समय बहजोई पुलिस लाइन में तैनाती है, जबकि अवनीश संभल में तैनात हैं।
अमरोहा में पोस्टिंग के दौरान आपरेशन के समय रितु चौधरी को ब्लड की जरूरत पड़ी तो अवनीश के कई दोस्तों ने रितु को रक्त दिया, जिससे उसकी जान बच गई। उस दिन से दोस्तों का ये कर्ज अवनीश पर ऐसा चढ़ा कि उन्होंने हर जरूरतमंद को ब्लड देने की सौगंध ले ली। अपने खून से वो दूसरों की जिंदगी सींचने लगे।
पोस्टिंग कहीं भी हो, जरूरतमंद को खून देने के लिए वो पहुंच ही जाते हैं। टीएमयू, अन्य निजी और सरकारी अस्पतालों में वो अब तक 12 से अधिक लोगों को रक्त देकर उनकी जान बचा चुके हैं।
इस तरह मिली प्रेरणा
उस वक्त वो अमरोहा में तैनात थे। अवनीश की पत्नी रितु चौधरी का शहर के एक निजी अस्पताल में डिलिवरी के लिए आपरेशन हुआ था। डाक्टरों ने रितु चौधरी के शरीर में ब्लड की कमी बताई। अवनीश से इसका इंतजाम करने को कहा। कांस्टेबल अवनीश ने पहले अपनी पत्नी को रक्त दिया, लेकिन वो पर्याप्त नहीं था। और खून चाहिए था।
पत्नी के लिए ब्लड का इंतजाम करने के लिए अवनीश ने बहुत दौड़भाग की। घर से दूर अमरोहा में कोई अपना नहीं था। इस मुश्किल भरी घड़ी में उनके मित्र काम आए। अवनीश के मित्र भूपेंद्र सिंह और विशाल को जैसे ही पता चला वो अन्य दोस्तों को लेकर अस्पताल पहुंचे और खून देकर रितु की जान बचाई।
तभी से अवनीश ने प्रण कर लिया कि वो भी जरूरत पड़ने पर किसी की जान बचाने के पीछे नहीं हटेंगे। अवनीश बताते हैं कि जब उन्हें पता चलता है कि किसी की जान बचाने के लिए ब्लड की जरूरत है, तो उनके अंदर एक तड़प सी उठती है। बस वो निकल पड़ते हैं उसकी मदद करने के लिए।