रविवार को गांव जाने के लिए अड़ गए। तो पुलिस फोर्स ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। पुलिस से भाजपाइयों की नोकझोंक हुई। पुलिस ने गांव में किसी बाहरी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।
थाने में हुए समझौते के आधार पर धार्मिक स्थलों पर कार्य नहीं किया जा रहा था।
यही वजह गत रविवार को बवाल का कारण बन गई थी। घरों में घुस-घुसकर लोगों को पीटा गया था और पथराव हुआ था। जो भी बवालियों के सामने आया था, वही निशाना बन गया था। पुलिस तक को दंगाइयों ने नहीं बख्शा था। दरोगा का सिर फोड़ दिया था। उपद्रवियों के गुस्से ने लोगों को घर छोड़कर भागने को मजबूर कर दिया था।
महिलाओं ने कमरे बंद कर जान बचाई थी। पुलिस फोर्स के आने पर ही उनकी जान बच सकी थी।
अब जब ये मसला सुर्खियों में छाया तो राजनीतिक संगठन सक्रिय हो गए। रविवार ही नहीं बल्कि सोमवार को भी भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों ने गांव में जाने की कोशिश की, किन्तु पुलिस फोर्स ने उनको सड़क पर ही रोक दिया। आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी। उधर क्षेत्र के माननीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।