पुलिस की करतूत यूं ही उजागर नहीं हुई। गो सेवा आयोग के सदस्य को जनपद पुलिस ने जो रिपोर्ट उपलब्ध कराई, उस पर बाकायदा एसपी के हस्ताक्षर हैं। कहा जाए तो पुलिस कप्तान की इस रिपोर्ट ने ही पूरी पोल खोलकर रख दी है। जिसमें बरामद पशु को एक ही गोशाला में सौंपने का जिक्र था। जिससे राजधानी तक में हंगामा मचा है। उच्चाधिकारी भी हैरान हैं।
शायद कप्तान ने ये नहीं सोचा होगा कि मामला यहां तक पहुंच जाएगा। पूरा महकमा कटघरे में खड़ा है। बहरहाल अब महकमे के अधिकारी अपनों की गर्दन को बचाने में जुट गए हैं। जांच अधिकारी द्वारा पड़ताल शुरू कर दी गई है।
पांच थानों द्वारा एक ही गोशाला को गोवंशीय पशु देने के मामले को लेकर पहले गो सेवा आयोग के सदस्य राहुल सिंह बिल्कुल गंभीर नहीं थे। हां, उनका बस यही सोचना था कि गोशाला अच्छी होगी, उसको इस बार अनुदान भी बढ़ाकर दिया जाएगा, लेकिन मौके पर पहुंचकर जब उन्होंने असलियत देखी तो चौंक गए थे। गोशाला की जगह में ईख पाई गई। फिर उनके जेहन में बस यही सवाल उठा कि सुपुर्दगी में दिए पशु फिर पुलिस कहां भेज रही है। उन्होंने पुलिस विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट देखी, जिससे पुलिस का कारनामा सामने आ गया।
सदस्य ने पूरे मामले से उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग को अवगत कराया। हैरानी की बात ये है कि रिपोर्ट में पुलिस ने पांच थानों का अगस्त माह का रिकार्ड आयोग के सदस्य को प्राप्त कराया था। इस रिपोर्ट किसी और के नहीं बल्कि खुद पुलिस अधीक्षक के हस्ताक्षर हैं। इससे कई सवालों के घेरे में खाकीधारी फंसते जा रहे हैं।
अगर पुलिस अब इस रिपोर्ट को झूठा ठहराती है तो साफ हो जाता है कि पुलिस कप्तान को अधीनस्थों ने बरगलाने का काम किया है। सही साबित करती है तो थानेदारों की गर्दन पर कार्रवाई का फंदा फंस रहा है। पूरी हकीकत तो एएसपी द्वारा शुरू की गई जांच के बाद ही सामने आएगी।