अमरोहा। बज्मे फरोग की जानिब से एक शाम नासिर अजीज के नाम से एक गजल महफिल का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। बख्तियार उल इस्लाम के आवास पर आयोजित गजल महफिल की शुरुआत सरताज अमरोहवी व मोहम्मद कासिम ने नात-ए-पाक से की।
मेहरबान अमरोहवी ने पढ़ कि मैं एक लफ्ज भी मर्जी से कह नहीं सकता, और एक तुम हो के आजाद कह रहे हो मुझे। नासिर अजीज ने पढ़ा कि जिन रास्तों से गुजरे थे, वहां ढूंढ ही लेंगे, हम आप के कदमों के निशा ढूंढ ही लेंगे।
बख्तियार इस्लाम ने कहा कि बिकने के लिए आये थे फनकार बहुत से, बाजार में कोई भी खरीदार नहीं था। सैय्यद शीबान कादरी ने कहा कि हम भी तेरी दुनिया में बहुत नाम कमाते, करता तू अगर हौसला अफजाई हमारी। अंदाज अमरोहवी ने कहा कि गुम हैं बच्चे मोबाइल में, और मैं बस्ता ढूंढ रहा हूं। नासिर अमरोहवी ने कहा दीवार में सर मारकर देखूंगा किसी रोज, मुमकिन है मेरे सिर से की बोझ उतर जाए।
जमशेद नवाज ने कहा तमाम उम्र जो गजलें बेहर में लाते रहे, कमाल जब था के खुद को बेहर में ले आते। महफिल की सदारत नदीम अब्बास जैदी ने की। महफिल में अनीस अहमद, नाजिश मुस्तफा, कासिम अमरोहवी, फैज आलम आदि ने भी कलाम पेश किए।