अमरोहा। मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र खोले गए हैं, लेकिन अमरोहा जिले में औषधि केंद्रों पर दवाओं का टोटा है। करीब पांच महीने से दवा की सप्लाई नहीं आई है। 1200 में से केवल 70-75 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। बुखार की पैरासिटामॉल तक नहीं है। खांसी, जुकाम और पेन किलर की दवाओं का टोटा है। दवा लेने आ रहे लोग लौट रहे हैं, जिससे सस्ती दवा देने का दावा हवाई साबित हो रहा है।
केंद्र सरकार ने सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का संचालन शुरू कराया था। जिला अस्पताल में भी जन औषधि केंद्र संचालित है। इन केंद्रों पर विभिन्न बीमारियों की 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने का दावा था, लेकिन मौजूदा समय में केवल 80 दवाएं ही उपलब्ध हैं। इनका भी स्टॉक समाप्त होने वाला है। चर्चा तो यह है कि संचालक निजी कंपनियों की दवाएं बेचने लगे हैं।
सस्ती दवाइयां मुहैया कराने के लिए साल 2018 में 26 जन औषधि केंद्र खोले गए थे। इनमें से अब तक 12 पर ताला लटक गया है। वर्तमान में 14 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। इन पर भी खांसी, बुखार, जुकाम व शुगर की दवाएं तो आसानी से मिल जाएंगी, लेकिन आंखों व दातों की दवा के अलावा हार्ट, कैंसर व गंभीर बीमारियों की दवा नहीं मिल पाती है। जबकि, जन औषधि केंद्रों पर 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं होनी चाहिए।
शुरुआत में जन औषधि केंद्रों पर दवाइयों की भरमार थी। मरीज व तीमारदारों को भी इसका फायदा मिल रहा था, लेकिन सरकार की योजना पर दवा की कमी और सरकारी व निजी डॉक्टरों के कमीशन का खेल पलीता लगा रहा है। जन औषधि योजना के तहत इन केंद्रों का संचालन शुरू होने के बाद भी निजी व सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों ने कमीशनखोरी के चलते जेनेरिक के बजाए ब्रांडेड दवाएं लिखना जारी रखा है। इसके चलते जन औषधि केंद्रों संचालकों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा, जिस पर जिले में संचालित केंद्र अब बंद होने की कगार पर पहुंचने लगे हैं। स्थिति यह है कि जिले में 12 जन औषधि केंद्र पूरी तरह बंद हो गए हैं। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि अब सभी सीएचसी पर जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे लोगों को सस्ती दवाइयां मिल सकें। संवाद