नगर पालिका तीन औद्योगिक इकाइयों को 50 लाख रुपये वापस करेगी। पालिका ने तीनों इकाइयों यह राशि संपत्ति कर के रूप में वित्तीय वर्ष मार्च 2025 तक वसूली थी, जबकि यूपीसीडा ने पालिका से सितंबर-2024 में ही औद्योगिक क्षेत्र वापस ले लिया था। अब पालिका संपत्ति कर के रूप में वसूली गई 50 लाख की रकम वापस करेगी।
साल 1985 में गजरौला में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना शुरू हुई थी। नगर में औद्योगिक इकाइयों के विकास के लिए साइट-एक व साइट-2 विकसित की गईं। दोनों साइट में अब 29 फैक्टरी हैं। औद्योगिक क्षेत्र में विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी यूपीसीडा पर थी। 28 मई 2020 तक फैक्टरी क्षेत्र यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के अधीन था। इसके बाद यूपीसीडा ने औद्योगिक इकाइयों का क्षेत्र गजरौला पालिका को हस्तांतरित कर दिया।
इसके बाद पालिका औद्योगिक इकाइयों से संपत्ति कर वसूल करती थी। वित्तीय वर्ष 2020-21 में पालिका को 2.10 करोड़ रुपये संपत्ति कर के रूप मिले, जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में एक ही इकाई से 37.26 लाख रुपये का टैक्स मिला। 2021-22 में ही सभी इकाइयों से सवा करोड़ रुपये मिले। वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी सवा करोड़ रुपये मिले। कर की इस रकम की 60 प्रतिशत धनराशि औद्योगिक क्षेत्र में, जबकि 40 फीसदी नगर में खर्च करती थी।
जुबिलेंट, तेवा, बेस्ट क्रॉप से संपत्ति कर मार्च 2025 तक का वसूल किया। यह राशि 50 लाख रुपये बनती है, जबकि यूपीसीडा ने सितंबर 24 में पालिका से औद्योगिक क्षेत्र ले लिया था और यूपीसीडा द्वारा औद्योगिक क्षेत्र वापस लेने के कारण औद्योगिक इकाइयों ने पालिका से अपनी संपत्ति कर के रूप में पूरे साल की दी गई रकम वापस करने को कहा है।
ईओ का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहीं एसडीएम चंद्रकांता ने बताया कि तीन औद्योगिक इकाइयों से संपत्ति कर के रूप में पहले ही वसूल कर ली गई 50 लाख रुपये धनराशि वापस की जाएगी।