अमरोहा। जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बने 500 से ज्यादा कांशीराम आवास खंडहर हो गए हैं। इनकी न तो देखरेख हो सकी और न किसी को आवंटित किए गए। इसे जिम्मेदारों की लापरवाही कहेंगे या राजनीतिक पटकथा। जिले में ऐसे हजारों परिवार हैं जिनके पास रहने के लिए छत नहीं है। हजारों परिवार पीएम आवास योजना के तहत छत मिलने की आस में भटक रहे हैं।
यह कांशीराम आवास बसपा शासन काल में बने थे और आज तक उन्हें आवंटित नहीं किए गए। यह आवास खंडहर बन चुके हैं। अपराधी और नशेड़ी प्रवृत्ति के लोगों ने इन आवासों को अपना अड्डा बना लिया है। इन आवासीय काॅलोनी में बिजली और पानी की आपूर्ति का काम अभी अधूरा है।
बहुजन समाज पार्टी की सरकार के 2007 से 2012 तक जिले की अमरोहा, गजरौला, हसनपुर, धनौरा, बछरायूं और उझारी नगर निकायों में गरीबों के लिए आवास मुहैया कराने के उद्देश्य से कांशीराम आवासीय काॅलोनी का निर्माण कराया गया था। इनमें 2016 आवासों का निर्माण कराया गया जिनमें से 1500 आवास तो आवंटित कर दिए गए लेकिन 516 आवास आज तक आवंटित नहीं हो पाए है।
इसके तहत अमरोहा में 444 बनाए गए। साथ ही हसनपुर एसडीएम कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर कांशीराम आवासीय कॉलोनी बनाई थी। काॅलोनी में 84 फ्लैट बने हुए हैं जबकि रामपुर भूड़ गांव के नजदीक भी कांशीराम कॉलोनी में आवास बनाए गए थे। इनमें 156 फ्लैट बने हैं। हसनपुर में कुल 516 आवास बने थे। इसके अलावा बछरायूं में 444, मंडी धनौरा में 156, गजरौला में 312 व उझारी में 144 आवास बने थे लेकिन गजरौला में 60, हसनपुर 240, धनौरा में 96 और बछरायूं में 120 आवासों को आज तक आवंटित नहीं हो सका है।
इन फ्लैटों के दरवाजे, खिड़कियां व शीशे भी लगाए गए थे। रंगाई-पुताई का कार्य भी पूरा किया गया लेकिन 2012 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आई तो इन आवासों को आवंटित नहीं कराया जा सका। आवास आवंटन की प्रक्रिया शुरू जरूर हुई थी लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इसके बाद वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। लोगों को उम्मीद थी कि इस सरकार में आवासों का आवंटन हो जाएगा लेकिन इस सरकार में भी आवासों के आवंटन के संबंध में कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। वर्ष 2022 में प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बनी लेकिन सरकार बनने के करीब तीन से ज्यादा साल का समय बीतने के बाद भी आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। जिससे जरूरतमंद लोगों को पक्के घरों का सपना अधूरा पड़ा है।