अमरोहा कलक्ट्रेट में मंडलायुक्त से अपने बेटे की जिंदगी के लिए गुहार लगाती मां
- फोटो : amar ujala
कमिश्नर साहब मेरे बेटे की जिंदगी बचा लो, साहब मेरा पांच साल का बेटा गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं, एम्स अस्पताल नई दिल्ली में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। ये किसी फिल्म के डायलॉग नहीं है। एक मां की गुहार है, जो अपने जिगर के टुकड़े की जिंदगी बचाने के लिए अफसरों के सामने गिड़गड़ाती रही।
मंडी धनौरा के मोहल्ला चामुंडा के रहने वाले शेरखान मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनके दो बच्चे हैं, एक पांच साल का लड़का सुहैल और एक तीन साल की बेटी है। शेरखान के बेटे सुहैल को जन्म से एक गुर्दा नहीं है। दूसरे गर्दे में संक्रमण है। इसके चलते वो जन्म से ही बीमार चल रहा है।
शेरखान उसकी बीमारी पर लाखों रुपये खर्च कर चुका है। इस समय एम्स नई दिल्ली अस्पताल में भर्ती है। शुक्रवार को शेरखान की पत्नी शहनाज ने कलक्ट्रेट पहुंचकर कमिश्नर और डीएम के सामने अपने बेटे की जिंदगी बचाने की गुहार लगाई। कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा और डीएम वेदप्रकाश ने पीड़ित मां को समझा बुझाकर शांत किया। बीपीएल कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया।