गजरौला (अमरोहा)। फैक्टरी से रिसाव की सूचना पर पहुंचे दमकल अधिकारी को गेट पर रोकने की घटना पर जिलाधिकारी उमेश मिश्र की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यहां स्थित दवा बनाने वाली इस्राइली कंपनी तेवा एपीआई लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही डीएम ने दो टूक कहा है कि प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। वहीं औद्योगिक नगरी में पहली बार हुई इस घटना से संबंधितों में खलबली मची हुई है।
गुरुवार की रात साढ़े आठ बजे जिलाधिकारी उमेश मिश्र ने बताया कि गजरौला में स्थित दवा बनाने वाली इस्राइली कंपनी तेवा एपीआई लिमिटेड में रविवार की रात को गैस रिसाव के बाद नगर में धुंध छाने और सांस लेने में तकलीफ होने की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से हुई थी। अगले ही दिन वहां क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के निरीक्षण की जानकारी मिली थी। वह टीम की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थे। यही वजह रही कि उन्होंने मंगलवार को फिर से वहां पांच सदस्यीय जांच टीम भेजी और सभी से अलग-अलग रिपोर्ट देने को कहा था। टीम में शामिल मुरादाबाद से आए असिस्टेंट डायरेक्टर इंडस्ट्रीज अनंत सिंह, एसडीएम मंडी धनौरा शशांक चौधरी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी जेपी मौर्य और मुख्य अग्निशमन अधिकारी के वर्मा आदि शामिल थे। इनसे मिली रिपोर्ट में यही सामने आया कि प्रथम दृष्टया फैक्ट्री में कुछ न कुछ गड़बड़ अवश्य रही होगी। डीएम उमेश मिश्र ने बताया कि उन्होंने गुरुवार की सुबह ही जांच रिपोर्ट शासन को प्रेषित की थी। साथ ही इस पर तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। यही वजह रही कि शाम को उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तेवा एपीआई लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
ये था मामला
रविवार की रात लगभग साढ़े नौ बजे नगर में धुंध सी छा गई थी और लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हुई थी। सीएफओ के वर्मा गाड़ी लेकर तेवा फैक्ट्री जा पहुंचे लेकिन गार्ड ने उन्हें भीतर नहीं जाने दिया। काफी देर तक विवाद होता रहा। उन्होंने गेट तोड़ने की धमकी दी तो गार्ड ने भीतर जाने दिया। उन्होंने फैक्टरी के एचसीएल टैंक की वीडियोग्राफी भी कराई थी। इसमें वहां से रिसाव साफ नजर आ रहा था। हालांकि प्रबंधन की ओर से दावा किया गया था कि धुंध एक कबाड़ी द्वारा स्क्रेप जलाए जाने के कारण छाई थी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम पर उठे सवाल
गजरौला। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा यहां स्थित दवा बनाने वाली इस्राइल कंपनी तेवा एपीआई लिमिटेड में सोमवार को पहुंचकर जांच की गई थी। टीम में शामिल बिजनौर से आए एई अनिल कुमार शर्मा ने दावा किया था कि उक्त धुंध फैक्टरी के सामने ही स्थित एक कबाड़ी द्वारा स्क्रेप जलाने के कारण वातावरण में छाई थी। हालांकि किसी के भी गले यह बात नहीं उतरी थी। डीएम उमेश मिश्र तक को यह तर्क काफी अटपटा लगा। यही वजह रही कि उन्होंने फिर से फैक्टरी में संयुक्त जांच टीम को भेजा। इस टीम की पैनी नजरों से वहां की खामियां छिप नहीं सकीं और उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। वहीं औद्योगिक इकाइयों पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मेहरबानी भी अब उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों के संज्ञान में आ गई है।
इस्राइल दूतावास ने किया फैक्ट्री प्रबंधन को तलब
गजरौला। सांसद दानिश अली ने अमर उजाला में प्रकाशित खबरों पर संज्ञान लेते हुए प्रदूषण की समस्या को लेकर प्रधानमंत्री आफिस को ट्वीट कर उन्हें टैंग किया था। बताते हैं कि पीएमओ ऑफिस की टीम ने इसे गंभीरता से लिया और इस संबंध में दिल्ली में स्थित इस्राइल दूतावास से संपर्क कर उन्हें जानकारी दी। इस पर इस्राइल दूतावास में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध में तेवा एपीआई लिमिटेड के प्रबंधन से भी जवाब-तलब किया है। फैक्ट्री के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि भी की है कि इस्राइल दूतावास से इस संबंध में जानकारी की गई थी। वहीं विधायक राजीव तरारा का कहना है कि वे अपने क्षेत्र मे प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी अनुरोध करेंगे। वहीं कई अन्य संगठन भी गजरौला की इकाइयों के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए एकजुट होने लगे हैं।
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