कालाधन और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए हथियार के तौर पर पांच सौ और एक हजार के नोट बंद किए जाने के बाद सोमवार को कैबिनेट मंत्री महबूब अली ने प्रधानमंत्री जमकर निशाना साधा। अपने आवास पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश के रेशम एवं वस्त्र उद्योग कैबिनेट मंत्री महबूब अली ने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला करार दिया। आरोप लगाया कि, इससे व्यापारी और किसान ठगा महसूस कर रहे हैं, समाज की व्यवस्था गड़बड़ा गई है।
रेशम एवं वस्त्र उद्योग मंत्री ने कहा कि, प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 की करेंसी को एकाएक अवैध घोषित कर देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति पैदा कर दी है। हो सकता है प्रधानमंत्री की नीयत ठीक हो, उनका फैसला सही हो, मगर इसके लिए समय गलत चुना गया है। क्रियांवयन की कोई योजना नहीं थी। इसलिए पूरा देेश ठहर सा गया है। कहा कि, यूपी और पंजाब चुनाव में लाभ लेने के लिए प्रधानमंत्री ने पुराने नोट बंद किए हैं। बाजार बंद हो गए हैं, कारोबार प्रभावित हो रहा है। कहा कि, सबसे ज्यादा रुपयों का लेनदेन व्यापारी ही करते हैं।
इस निर्णय ने व्यापारियों को कालाबाजारी करने वालों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। जनता में इतना आक्रोश है कि, दुकानों और बैंकों में तोड़फोड़ हो रही है। मेहनत से कमाया गया एक-एक नोट रखने वाला भी खुद को गुनहगार महसूस कर रहा है। ये वही आम आदमी और किसान मजदूर है। जिसने दुनिया में छाई मंदी के दौर में भारत को डूबने से बचाया था। अच्छे बुरे वक्त के लिए रुपया बचा कर रखना महिलाओं की प्रवृत्ति है, अब वे खुद को गुनहगार समझ रहीं हैं।
गेहूं की बुवाई के लिए किसान अपना गन्ना कोल्हू और क्रेशर पर बेचते हैं। नोटबंदी के चलते कोल्हू क्रेशर उद्योग भी चौपट हो गया है। हिंदू धर्म में शादी विवाह शुरू हो गए हैं, जिन घरों में शादी है वह परिवार भी परेशान हैं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री से पुराने नोट चलाने के लिए 30 नवंबर तक का समय मांगा है। जिससे आम आदमी परेशान न हो।