मंडी धनौरा। कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर सरकारी कर्मचारी कितने गंभीर है। इसका उदाहरण उस समय मिला जब गुरुवार की शाम चार बजे तक एक भी सरकारी कर्मचारी टीकाकरण के लिए नहीं पहुंचा। अधीक्षक से रिपोर्ट मिलने पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने मामले की गंभीरता से जिलाधिकारी को अवगत कराया। जिलाधिकारी के नाराजगी जताने के बाद मात्र 73 कर्मचारियों ने ही टीका लगवाया।
गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर खंड विकास कार्यालय, नगर पालिका परिषद धनौरा व बछरायूं और तहसील कार्यालय के कुल 236 कर्मचारियों को प्रात: नौ बजे से सायं पांच बजे तक कोरोना का टीका लगाया जाना था। सभी कर्मचारियों को इसकी सूचना समय पूर्व ही उपलब्ध करा दी गई थी। ठीक नौ बजे स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण के लिए अस्पताल में मुस्तैद हो गए। शाम चार बजे तक एक भी कर्मचारी टीका लगवाने नहीं आया। चार बजे सीएमओ कार्यालय से टीकाकरण की रिपोर्ट मांगी गई तो अधीक्षक डा. अमोल सिंह ने एक भी कर्मचारी द्वारा टीका नहीं लगवाने की जानकारी दी।
अधीक्षक से रिपोर्ट मिलने पर सीएमओ कार्यालय में खलबली मच गई। सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थिति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। जिलाधिकारी उमेश मिश्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए तहसीलदार, अधिशासी अधिकारी व बीडीओ से नाराजगी जताई तो आनन फानन में तीनों अधिकारी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को टीकाकरण के लिए बुलाया। इसके लिए एक घंटे का समय बढ़ाया गया लेकिन मात्र 73 कर्मचारियों ने ही कोरोना वैक्सीन लगवाई जबकि 236 कर्मचारियों को टीका लगाया जाना था। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सरकारी कर्मचारियों में कोरोना वैक्सीन का टीका नहीं लगवाना चर्चा का विषय बन गया है।