अमरोहा। गांव में अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए सतपाल द्वारा अधिकारियों से की गई शिकायत उनकी हत्या का कारण बनी थी। दोषियों ने शराब में जहर मिलाकर और सतपाल को जबरन पिलाकर माैत के घाट उतार दिया था। इन्साफ के लिए सतपाल की पत्नी सुरेखा ने न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया था। 190 तारीखों पर सुरेखा समेत नाै लोगों ने गवाही दी। इसके बाद दोषियों को उम्रकैद की सजा हुई। सजा दिलाने में एफएसएल रिपोर्ट ने भी अहम भूमिका निभाई।
नौगांवा सादात क्षेत्र के बागड़पुर इम्मा में 11 दिसंबर 2013 की रात किसान सतपाल को गांव के ही राजीव, वीरेश, राजेश और सुंदर घर से बुलाकर ले गए। इसके बाद चारों ने शराब में जहर मिलाकर सतपाल को पिला दिया। रात में ही करीब नौ बजे चारों आरोपी सतपाल को उसके घर के बाहर फेंक गए थे। अगले दिन सतपाल की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया लेकिन, मुकदमा दर्ज नहीं किया था।
मृतक की पत्नी सुरेखा इन्साफ के लिए भटकती रहीं। अंत में न्यायालय की शरण ली और तीन अप्रैल 2014 को न्यायालय के आदेश नौगांवा सादात पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने करीब सात महीने तक बारीकी से विवेचना की और मजबूत साक्ष्यों के साथ 10 दिसंबर 2014 को न्यायालय में 98 पेज की चार्जशीट दाखिल की।
16 जनवरी 2014 को न्यायालय ने मुकदमे में पहली सुनवाई की। इसके बाद 20 जून 2015 को न्यायालय ने मुकदमे को चार्ज पर लिया। बीते शुक्रवार को न्यायालय ने आखिरी सुनवाई करते हुए आरोपी राजेश, सुंदर और राजीव को दोषी करार दिया था। कोर्ट में करीब 11 साल तक मुकदमे की सुनवाई चली। इस बीच 190 तारीखें पड़ीं। न्यायालय ने अभियोजन और विपक्ष के तर्कों को सुना। मृतक सतपाल की पत्नी सुरेखा समेत नौ लोगों ने कोर्ट के सामने गवाही दी। सुरेखा ने बयानों में कहा था कि आरोपी सुंदर अपने घर में अवैध शराब का कारोबार करता था। जिसकी शिकायत उसके पति सतपाल ने अधिकारियों से की थी। इससे आरोपी और उसके साथी रंजिश मानने लगे थे और घटना वाले दिन उसके सामने सतपाल को घर से ले गए और शराब में जहर मिलाकर पिला दिया।
सुरेखा ने कहा कि सतपाल शराब पीने के आदी नहीं थे। उनकी हत्या करने के इरादे से ही शराब में जहर मिलाकर जबरन पिलाया गया। सुनवाई के दाैरान ही एक आरोपी वीरेश की माैत हो गई। हत्याकांड में शामिल राजेश, सुंदर और राजीव ने न्यायालय के सामने खुद को निर्दोष बताया लेकिन एफएसएल रिपोर्ट के सामने उनके तर्क नाकाफी साबित हुए।
पूरे प्रकरण में तीनों दोषियों को सजा दिलाने में एफएसएल रिपोर्ट में अहम भूमिका निभाई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अमित कुमार वशिष्ठ ने बताया कि सतपाल के शव से लिए गए बिसरा की एफएसएल रिपोर्ट में जहर की पुष्टि हुई थी। ऐसे में दोषियों का किसी भी स्थिति में बचना मुश्किल था और यही हुआ। तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा हुई। संवाद
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खून की उल्टी आने पर गहराया था जहर देने का शक
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अमित कुमार वशिष्ठ ने बताया कि घटना वाली रात आरोपी सतपाल को उसके घर के बाहर कुट्टी काटने की मशीन के पास आरोपी फेंक कर चले गए थे। इस दौरान सतपाल की हालत बिगड़ी हुई थी। उसने अपनी पत्नी सुरेखा को पूरा घटनाक्रमबताया था। उसकी पत्नी ने अपने परिवार के लोगों के साथ सतपाल का इलाज कराया लेकिन उसकी मौत हो गई। खून की उल्टी होने के बाद से ही परिजनों को शराब में जहर देकर मारने का शक गहराया था।
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न्याय के लिए मजबूत इरादों के साथ खड़ी रहीं सुरेखा
सुरेखा अपने पति सतपाल को इन्साफ और दोषियों को सजा दिलाने के लिए मजबूत इरादों के साथ खड़ी रहीं। मुकदमा दर्ज कराने के लिए ही उन्हें संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद करीब 10 साल तकक कोर्ट में पैरवी की। इस बीच कई तरह की परेशानियां झेलीं, लेकिन पति को इन्साफ दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके मजबूत इरादों की वजह से दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली। सुरेखा ने कहा कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा था।
अब मुरादाबाद में रहती हैं सुरेखा
पति सतपाल की हत्या के बाद दबंगों के डर से सुरेखा अपने तीन बच्चों को लेकर मुरादाबाद चली गई थीं। वहीं रहकर मुकदमे की पैरवी की। मृतक सतपाल के परिवार में पत्नी सुरेखा के अलावा दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा रवि, मझला बेटा अजय और सबसे छोटी बेटी आंचल है। सुरेखा के दोनों बेटे मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं।