अमरोहा। तालाब की जमीन पर रशीदा बेगम मुस्लिम महाविद्यालय, मेस्को पब्लिक स्कूल और मेस्को इंस्टीट्यूट आफ फार्मेसी, मेस्को इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज की इमारत खड़ी करने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मान्यता लेने के मामले में अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण प्रधान पीठ ने जांच बैठा दी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेक्रेटरी और अमरोहा डीएम को नामित किया है। साथ ही पीठ ने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
पीठ ने ये निर्देश अमरोहा निवासी डॉ. सैयद तौसीफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए है। उनका आरोप है कि तालाब की जमीन पर चार शैक्षणिक संस्थान स्थापित हैं। तालाब की जमीन पर इमारत खड़ी करके गलत तरीके से मान्यता ली है। जबकि तालाब की प्रवृत्ति को किसी भी कीमत पर बदला नहीं जा सकता है। पहले नक्शा खारिज हो चुका है, लेकिन बाद में फर्जी दस्तावेज तैयार करके दोबारा अनुमति ले ली गई है।
ये है पूरा मामला
अमरोहा के मोहल्ला गस्तियान निवासी डॉ. सैयद तौसीफ ने मुख्यमंत्री एवं एमजेपी रुहेलखंड विद्यालय के रजिस्ट्रार को शिकायत करते हुए राशिदा बेगम मुस्लिम महाविद्यालय के अध्यक्ष कमाल फारूकी पर मेस्को स्कूल और फार्मेसी कॉलेज की इमारत तालाब की भूमि में बनाने का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद एसडीएम ने तहसीलदार से मामले की जांच कराई थी। नियत प्राधिकारी एवं एसडीएम विनियमित क्षेत्र सुधीर कुमार ने बताया कि निजामपुर गर्मी में गाटा संख्या 311 अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है।
चकबंदी के बाद ये गाटा संख्या 403 और 404 बन गए हैं। तालाब की जमीन होने के बावजूद मेस्को इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, मेस्को पब्लिक स्कूल और रशीदा बेगम महाविद्यालय की इमारतें खड़ी कर दी गईं। इस मामले में रशीदा बेगम मुस्लिम महाविद्यालय समेत सभी संस्थाओं से जुड़े दस्तावेज तलब किए थे। जिसके बाद मामले में कार्रवाई करते हुए नक्शा निरस्त कर दिया है। इससे पहले फार्मेसी कॉलेज की इमारत का नक्शा निरस्त किया जा चुका था। जिसके बाद डॉ. सैयद तौसीफ ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण प्रधान पीठ के यहां याचिका दायर की है।
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