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गजरौला की उमंग डेयरी पर एनजीटी ने लगाया चार करोड़ 85 लाख 44 हजार रुपये का जुर्माना

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एनजीटी ने खेतों में गंदा पानी छोड़ने और डार्क जोन में होने के बावजूद भूमिगत जल का अधिक दोहन करने के मामले में गजरौला की उमंग डेयरी पर चार करोड़ 85 लाख 44 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। डेयरी के खिलाफ दो साल से एनजीटी में मामला चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट में प्रेक्टिस कर रहीं गजरौला निवासी अधिवक्ता मानसी चाहल ने बताया कि अगस्त-2020 में कुछ ग्रामीण लोग उनके पास आए। उनको बताया कि उमंग डेयरी द्वारा छोड़े गए गंदे पानी से उनके खेतों में खड़ी फसल नष्ट हो रही है। ग्रामीणों के कहने पर अधिवक्ता मानसी चाहल ने अगस्त-20 में ही डेयरी के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की। जिस पर एनजीटी ने कमेटी गठित कर जांच कराई। कमेटी ने डेयरी का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी। जिसमें कहा गयाकि डेयरी का गंदा और केमिकल युक्त पानी न केवल फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आस पास मच्छर भी पनप रहे हैं। इसके अलावा डेयरी में गलत तरीके से भूमिगत जल दोहन का मामला भी सामने आया। जिस पर एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायाधीश आदर्श गोयल, ज्यूडिसियल मेंबर सुधीर अग्रवाल व एक्सपर्ट मेंबर नागिन नंदा ने सुनवाई करते हुए डेयरी को गंदा पानी छोड़ने व जल के अधिक दोहन का दोषी करार देते हुए
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अपना निर्णय सुरक्षित किया। शुक्रवार को एनजीटी ने अपना फैसला सुनाया। इस दौरान ग्रामीणों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मानसी चाहल, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा, सीजी डब्ल्यू ए की तरफ से श्रेया श्रीवास्तव व उमंग डेयरी की ओर से पिनाकी मिश्रा, आशीष प्रसाद ने जोरदार पैरवी की। उमंग डेयरी की तरफ से दिए गए तर्क को एनजीटी ने खारिज करते हुए उस पर चार करोड़ 85 लाख 44 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
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एनजीटी में डेयरी का मामला चल रहा है, लेकिन उस पर कोई जुर्माना लगाया गया है, यह उनको जानकारी नहीं है-बीसी वर्मा एचआर हेड उमंग डेयरी गजरौला।
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