यूपी के अमरोहा स्थित गंगा के टापू में बसे दारानगर गांव निवासी मुकेश ने बताया कि वह पत्नी हरवती को प्रसव पीड़ा होने पर बीते बुधवार सुबह सीएचसी में लाया था। नार्मल डिलिवरी से उनकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया लेकिन जब पता चला कि नवजात में कोई हलचल न होने पर दंपती और परिजन चितिंत हो गए। करीब चार घंटे भी यही स्थिति रहने पर वह परेशान हो गए। इस बीच वह सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ व सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेंद्र सिंह से मिले।
उन्होंने नवजात को एनबीएसयू (न्यू बोर्न स्टेबलाइज्ड यूनिट) में भर्ती कराया। इसके बाद नवजात में कुछ हलचल हुई और उसका दिल धड़कने लगा। डॉक्टर ने बताया कि अब नवजात खतरे से बाहर है। जिस पर परिजनों की खुशियां लौट आईं।
सीएचसी प्रभारी ने बताया कि एनबीएसयू में भर्ती नहीं कराते तो नवजात की जिंदगी जा सकती थी। इसमें उन बच्चों को ही भर्ती किया जाता है, जो पीलिया या न्यूमोनिया से ग्रसित हों। इसके अलावा जिन बच्चों को ऊष्मा (वार्मर) की जरूरत पड़ती है, वह भी भर्ती किए जाते हैं। उनको रेडिएंट वार्मर मशीन से गर्मी दी जाती है। यह नवजातों के लिए वरदान है।