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नौगांवा सादात : अब दो शावकों संग दिखा एक और तेंदुआ

Mon, 09 Jun 2025 02:01 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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नौगांवा सादात (अमरोहा)।
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कुतुबपुर हमीदपुर गांव के लोग एक तेंदुए को मारकर भी दशहत से नहीं उबर सके हैं। रविवार को दो शावकों के साथ एक और तेंदुआ खेतों में देखा गया। घबराए ग्रामीण उल्टे पांव अपने घरों को लौट आए। उनकी नाराजगी है कि इसके बाद भी तेंदुआ पकड़ने के लिए क्षेत्र में पिंजरा नहीं लगाया गया।

शनिवार की सुबह खेतों में काम कर रहे कुतुबपुर हमीदपुर गांव के किसानों पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। एक-एक कर तेंदुए के निशाने पर आकर छह लोग घायल हो गए थे। इससे गुस्साए ग्रामीणों द्वारा लाठी-डंडों से पीटने पर तेंदुए की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद रविवार को वन विभाग और पुलिस ने तेंदुए की हत्या में भले तीन लोगों को जेल भेज दिया था, लेकिन ग्रामीणों को तेंदुए की दहशत से बाहर आ जाने की उम्मीद थी। हालांकि, ऐसा हो नहीं सका। रविवार सुबह करीब नौ बजे गांव के ही रहने वाले रत्नेश और धन सिंह खेत में टमाटर तोड़ रहे थे। तभी उन्होंने दो शावक और एक तेंदुए को घूमते देखा।
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एक और तेंदुआ देखकर रत्नेश और धन सिंह के होश उड़ गए। वह घरों की ओर भागे और अन्य ग्रामीणों को बताया। इसके बाद ग्रामीणों ने खेतों की तरफ जाना बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि एक और तेंदुआ व दो शावकों को देखे जाने के बाद वन विभाग को सूचित किया गया लेकिन न पिंजरा लगाया और न ही ग्रामीणों की सुरक्षा का कोई और इंतजाम किया। वन विभाग की टीम गांव पहुंची लेकिन पूछताछ करके ऐसे ही लौट गई। उधर, उप वन क्षेत्र अधिकारी राजीव वर्मा ने दोबारा तेंदुए दिखाई देने की बात से इन्कार किया है।

ग्रामीणों पर दोहरी मार, दहशत बरकरार
नौगांवा सादात। कुतुबपुर हमीदपुर के लोग आजकल अजीबो-गरीब स्थिति का सामना कर रहे हैं। एक तेंदुए को मार देने पर प्रधान का भाई समेत तीन को जेल भिजवाने के साथ वन विभाग ने तहरीर में अज्ञात शब्द इस्तेमाल कर अन्य ग्रामीणों पर भी तलवार लटका दी है। दूसरी ओर रविवार को दो शावकों के साथ नजर आए तेंदुए की घेराबंदी का कोई प्रयास शुरू नहीं किया है।

शनिवार के घटनाक्रम का हवाला देते हुए कुछ ग्रामीणों ने कहा कि खेत से टमाटर तोड़ते वक्त तेंदुए के हमले का शिकार किसान अब तक डर से बाहर नहीं आ पाया है। उस हमले के बाद जब ग्रामीणों ने तेंदुए को घेरना शुरू किया तो उसने एक-एक करके पांच और किसानों को घायल कर दिया। उस समय की स्थितियां इस तरह की थीं कि किसानों को अपनी जान बचाने के लिए लाठी उठानी पड़ी। ज्यादा पिटाई से तेंदुआ मर गया। उस समय की ग्रामीणों की मजबूरी समझे बिना पुलिस और वन विभाग ने एफआईआर की कागजी पेशबंदी शुरू कर दी। तीन लोगों को जेल भी भेज दिया।
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ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि अगर वन विभाग इलाके में बढ़ते तेंदुओं को लेकर ईमानदारी से सतर्कता बरतता तो शनिवार को ग्रामीणों को अपने बचाव में डंडा उठाने की नौबत क्यों आती। इसी तरह रविवार को दो शावकों के साथ नजर आए तेंदुए को लेकर भी न वन विभाग गंभीर है और न ही पुलिस या प्रशासन के आला अफसर इस मामले में दखल दे रहे हैं। इन स्थितियों में ग्रामीणों और तेंदुए का फिर सामना होने पर अनहोनी के अलावा और क्या नतीजा सामने आएगा।
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