यहां और आसपास की तकरीबन एक हजार नर्सरी में विकसित पौधे देश को हरा-भरा बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यहां तैयार किए गए पौधे दिल्ली से महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, आंध्रप्रदेश तक हरियाली बिखेर रहे हैं। चालीस साल पहले सिहाली जागीर क्षेत्र में नौशे खां ने पहली नर्सरी लगाई।
इसके लाभकारी होने और हरियाली में योगदान को देखकर दूसरे ग्रामीणों की भी इस कारोबार में दिलचस्पी जगी। इस पर एक के बाद एक नर्सरी शुरू किए जाने से तकरीबन बीस किलोमीटर के क्षेत्र में एक हजार से अधिक नर्सरी में पौधे तैयार किए जाने लगे। अधिकांशत: कलकत्ता, आंध्र प्रदेश, बेंगलुरू, पूणे के नर्सरी कारोबारियों से पौधों का लेनदेन किया जाता है।
हसनपुर रोड पर स्थित नर्सरी के संचालक सिहाली जागीर के नौशे खां ने चालीस साल पहले क्षेत्र में नर्सरी के कारोबार की शुरुआत की थी। उस वक्त नौशे 22 साल के थे और कुछ साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। वह पिता शमीउल्ला खां के साथ खेती करते थे। उनका कहना है कि, उनके 50 बीघा बाग के पास पंजाबी फार्म हाउस में लिप्टिस के पेड़ थे। फार्म हाउस मालिक ने काफी रकम में ये पेड़ बेचे थे। इस पर उन्हें पेड़ लगाने की बात सूझी।
चौपला पर स्थित तत्कालीन सरकारी नर्सरी से वह लिप्टस की पौध लेने गए तो संचालक ने 10 पैसे के एक पौधे के बजाय 50 पैसे में दिया। उसने 200 पौधे तो खरीद लिए, लेकिन नर्सरी संचालक से कहा कि, अब वह नर्सरी नहीं आएगा, संचालक को ही उसके पास पौधे लेने आने होंगे। इसके बाद वह ब्रजघाट पहुंचा, नेशनल हाईवे किनारे लगे लिप्टस के पेड़ों पर चढ़ कर बीज तोड़े। बीज बोने के लिए पत्नी से बरसाती के टुकड़े करा कर थैली बनवाई। तैयार हुई 100 थैलियों में बीज बो दिए। कुछ दिन बाद ही एक-एक फीट के पौधे हो गए, लेकिन थैली का डोरा टूटने से पेड़ बिखर गए थे। इसके बाद 600 रुपये उधार लेकर मुरादाबाद से 22 रुपये किलो के हिसाब से थैली खरीदीं और थैली और जमीन में पौधे लगाकर नर्सरी शुरू की।
नौशे खां ने बताया कि शुुरुआत में तिहाड़ जेल के निकट स्थित नर्सरी संचालक मुन्नीलाल पौधे लेने उनके पास आया था, लेकिन एक ट्रक पौधे कीड़े की वजह से दिल्ली पहुंचते ही सूख गए। वह तगादा करने दिल्ली गए तो मुन्नीलाल ने इंग्लिश गुलाब लगाने के लिए प्रेरित किया। ये भी बताया कि इंग्लिश गुलाब शाहजहांपुर और मेरठ में मिलेगा। गुलाब को बोने की तरकीब भी बताई। मेरठ के सिरसी हाउस से 100 रुपये में लाल और पीले गुलाब के 10 पौधे खरीदे।
शाहजहांपुर से एक व्यक्ति को बुला कर गुलाब का बगीचा बनाया। एक लड़के को चौपला पर बिठा कर गुलाब बिकवाए। इसी दौरान धनौरा और अमरोहा के माली गुलाब ले जाने लगे। इसके बाद मेरठ से गुगनवेल, गुलदाउदी आदि के पौधे लगवाए जो दिल्ली में सप्लाई किए। धीरे-धीरे दिल्ली में कारोबार फैलने लगा। बीस साल से दिल्ली के बसंत कुंज में नर्सरी चल रही है।