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Amroha News: मच्छर से डेंगू तो खटमल से हो रहा स्क्रब टाइफस

Wed, 10 Sep 2025 02:50 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। जिले में डेंगू लगातार अपने पैर फैला रहा है। अब तक इससे संक्रमित करीब 15 मरीज मिल चुके है। वहीं, अब पिस्सू यानी खटमल से होने वाले स्क्रब टाइफस के भी मामले सामने आए है। एक महीने में सरकारी अस्पतालों में इससे संबंधित 20 मरीजों का इलाज किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक अगर किसी भी व्यक्ति में स्क्रब टाइफस के लक्षण पाए जाएं तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच करवाएं।
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बरसात में तेज बुखार आना स्क्रब टाइफस का मुख्य लक्षण है। यह रोग एक जीवाणु विशेष (रिकेटशिया) से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है। पिस्सू खेतों, झाडियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टाइफस बुखार पैदा करता है।
इस बीमारी के लक्षणों में तेज बुखार जो 104 से 105 डिग्री, जोड़ों में दर्द, शरीर में ऐंठन, गर्दन में गिल्टियां आदि शामिल हैं। इसकी रोकथाम के लिए शरीर को ढक कर रखें, घर के आसपास साफ सफाई रखें और जब भी खेतों में जाएं तो शरीर को सही तरीके से ढक कर रखें। इसके अतिरिक्त घर में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करें। स्क्रब टाइफस के लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
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ऐसे फैलता है स्क्रब टाइफस
खटमल के काटते ही उसके लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है सुसुगार् छोटा व खतरनाक और मुशी मतलब माइट। इसकी वजह से लिवर, दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं और मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर के स्टेज में पहुंच जाता है।

ऐसे होता इसका इलाज
डाॅक्टरों के मुताबिक लक्षण व खटमल द्वारा काटने के निशान को देखकर रोग की पहचान होती है। ब्लड टेस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर फंक्शनिंग टेस्ट करते हैं। एलाइजा टेस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेंस टेस्ट से स्क्रब टाइफस एंटीबॉडीज का पता लगाते हैं। इसके लिए 7-14 दिनों तक दवाओं का कोर्स चलता है। इस दौरान मरीज कम तला-भुना व लिक्विड डाइट लें। कमजोर इम्युनिटी या जिन लोगों के घर के आसपास यह बीमारी फैली हुई है उन्हें डॉक्टर हफ्ते में एक बार प्रिवेंटिव दवा भी देते हैं।

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ऐसे लोगों को है खतरा, बरतें सावधानी
जंगल और खेतों के आसपास यह पिस्सू ज्यादा पाए जाते हैं लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे या घने घास के पास इस पिस्सू के काटने का खतरा रहता है। सीएमओ डाॅ. एसपी सिंह ने बताया कि घर में सोने, उठने या बैठने की जगह सीलन न होने दें। चारपाई में खटमल न होने दें। अगर खटमल हैं तो उसकी रोकथाम के लिए कीटनाशक स्प्रे कराया जाए।
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