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Amroha News: पहले किया इनकार, अब बीमा कंपनी को दो पॉलिसी के देने होंगे 23.21 लाख

Wed, 10 Sep 2025 02:49 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। किसान की मौत के बाद बीमा कंपनी ने दो पॉलिसियों के क्लेम का भुगतान करने से मना कर दिया। मामले में उपभोक्ता आयोग ने 23.21 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत चुकाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक और आर्थिक पीड़ा व वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये भी बीमा कंपनी को देने होंगे। यह रकम एक माह में अदा करनी होगी।
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नौगांवा सादात थानाक्षेत्र के पीलाकुंड गांव में दिवंगत रघुराज का परिवार रहता है। रघुराज सिंह ने बीमा कंपनी से दो पॉलिसी ली थीं। पहले पॉलिसी दो अगस्त 2017 को और दूसरी 14 सितंबर 2017 को ली थी। दोनों पॉलिसी में उनकी पत्नी उर्वशी नॉमिनी हैं। सात मई 2018 को सांप के काटने से रघुराज सिंह की मौत हो गई थी। इस मामले में उर्वशी ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो 18 फरवरी 2019 को बीमा कंपनी ने क्लेम के आवेदन को निरस्त कर दिया। इस दौरान बीमा कंपनी ने सिर्फ प्रीमियम धनराशि 1.18 लाख रुपये उनके खाते में जमा कर दी।
बीमा कंपनी ने तथ्यों को छिपाने का हवाला देते हुए क्लेम को निरस्त किया, लेकिन यह जानकारी उर्वशी को नहीं दी गई। यह भी नहीं बताया कि पीड़ित परिवार द्वारा किन तत्वों को छिपाया गया है। इस दौरान उर्वशी ने बीमा कंपनी पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। मामले को गंभीरता से लेकर उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया।
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इस दौरान बीमा कंपनी ने अपना तर्क रखा कि रघुराज सिंह ने दोनों पॉलिसी 31 जुलाई 2017 से 14 सितंबर 2017 के बीच प्राप्त की थीं और उनकी मृत्यु एक वर्ष के भीतर हो गई। इस दौरान उनके द्वारा मटेरियल फैक्ट अपने प्रस्ताव फॉर्म में न दर्शाकर बीमा शर्तों का उल्लंघन किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने पाया कि बीमा कंपनी ने उर्वशी के दावे को निरस्त कर रांगफुल ट्रेड प्रेक्टिस अपनाई है। साथ ही बीमा कंपनी ने गलत तरीके से प्रीमियम की राशि उर्वशी के खाते में वापस की गई। इस दौरान आयोग ने बीमा कंपनी पर उर्वशी के खाते में भेजी गई धनराशि को काटकर दोनों पॉलिसी के 23,21,50 रुपये को नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक एवं मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार व वाद व्यय खर्च के लिए 10 हजार रुपये भी बीमा कंपनी को देने होंगे।
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