पहले भी इस तरह के मामलों में शिकायतें हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से संबंधित अधिकारियों के हौंसले बढ़ जाते है। हाल में एंटी करप्शन की टीम ने नक्शा पास करने के लिए 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते विनियमित क्षेत्र के जेई भानू प्रताप सिंह व बिचौलिये शादाब को गिरफ्तार किया है। दोनों को बरेली कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया है। विनियमित क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण करने के लिए नक्शा अथवा ले-आउट पास कराना अनिवार्य होता है। इसके लिए विनियमित क्षेत्र के जेई के रिपोर्ट देने के बाद ही नक्शा स्वीकृत होता है, लेकिन नक्शा पास कराने के लिए जरूरतमंदों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी।
सभी कागजात पूरे होने के बाद भी बिना सुविधा शुल्क फाइल आगे नहीं बढ़ती थी। अगर किसी से रिश्वत मिल जाए तो उसका आसानी से नक्शा स्वीकृत हो जाता है। वरना सालों तक फाइलें दबकर रह जाती हैं। यही वजह है कि विनियमित क्षेत्र के कार्यालय में 100 से अधिक भवन निर्माण के नक्शे की फाइलें धूल फांक रही है।
जेई के खिलाफ पहले भी हो चुकी है शिकायत
जेई भानुप्रताप सिंह की कारगुजारियों को लोग पहले भी शिकायत के जरिए उजागर करते रहे हैं। ऐसा नही है, कि उनके खिलाफ यह पहली शिकायत हुई हो। पिछले साल भी मुख्यमंत्री समेत जिले के आला अधिकारियों को भी जेई द्वारा नक्शा पास करने के लिए सौ रुपये प्रति वर्गमीटर व व्यवसायिक भवनों के लिए 500 रुपये प्रति वर्गमीटर या भूमि का 20 फीसदी के हिसाब से सुविधा शुल्क लेने की शिकायत की गई थी। साथ ही पत्रावलियों में बेवजह आपत्ति लगाने का आरोप भी लगाया था। इतना की नही शिकायत में जेई पर बिजनौर रोड पर एक बैंक्वेट हॉल के पास एक समानांतर कार्यालय चलाए जाने का आरोप भी लगाया गया था। जहां से सुविधा वसूली का पूरा खेल चलता था। अब वहीं से वसूली का पूरा खेल सामने आया है। अगर तभी शिकायत के आधार पर जेई पर कार्रवाई हो गई होती, तो एंटी करप्शन तक सुविधा शुल्क की वसूली के इस खेल का मामला नहीं पहुंचता।
शहर में चल रहा अवैध प्लॉटिंग का खेल
शहर को सुनियोजित और सुव्यवस्थित बसाए जाने के लिए महायोजना भले ही मंजूर हो गई हो, लेकिन जमीन कारोबारी अवैध प्लॉटिंग कर शहर को सूरत को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। शहर में करीब सौ से अधिक अवैध कॉलोनियों की सूची पहले भी शासन को भेजी जा चुकी है। विनियमित क्षेत्र की ओर से भी लगातार ऐसी कॉलोनियों पर अंकुश लगाने के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कारोबारी मनमाने तरीके से फिर से प्लॉटिंग शुरू कर देते हैं। ऐसे ही एक मामले में डीएम के निर्देश पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। लेकिन इसके बाद भी अवैध कॉलोनियों का यह खेल थम नहीं पा रहा है।
जरूरी अभिलेख पूरे न होने पर ही नक्शे की फाइलें पास नही होती। फाइलें क्याें रूकी हुई हैं, इसको भी दिखवाया जाएगा। इसके अलावा अवैध कॉलोनियों पर भी कार्रवाई लगाातर जारी रहेगी। - सुधीर कुमार सिंह, एसडीएम सदर/ विनियमित प्राधिकारी