अमरोहा। यस बैंक की हालत जिले में खस्ता है। जिले की 22 बैंकों में सबसे कम पूंजी जमा वाले बैंकों में दूसरे नंबर पर है। इससे कम पूंजी की एक और बैंक शाखा है। दिसंबर 2019 के आंकड़ों पर गौर करें तो बैंक में महज 5.59 करोड़ रुपये जमा है, जबकि लोन का 87.78 लाख रुपये बांट चुकी है। केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी योजना के लाभार्थी को लोन नहीं मिला है। वित्तीय वर्ष के दूसरी तिमाही से बैंक में जमा रकम भी घटती गई हैं। अब सवाल उठता है कि बैंक आखिर अपने रसूख को वापस हासिल कर सकेगा।
जिले में यस बैंक की गजरौला में इकलौती शाखा है। यहां करीब 1500 खाताधारक हैं। बैंक इस वक्त संकट के दौर से गुजर रहा है। आरबीआई ने बैंक के बोर्ड को भंग कर दिया है। इसके अलावा उसने रकम की निकासी की सीमा भी 50 हजार तय कर दी है। बैंक के ग्राहकों में शनिवार को बेचैनी रही। उन्होंने रकम की निकासी के लिए जुगाड़ लगाया। बैंकिंग स्टेटिसटिक्स, 31 दिसंबर 2019 के अनुसार बैंक शाखा में 5.59 करोड़ रुपये जमा है। इसमें 1.78 लाख रुपये छोटे स्माल स्केल इंडस्ट्रीज/स्माल एंड मीडियम इंडस्ट्रीज में 1.78 लाख रुपये का लोन वितरित किया गया है। इसके अलावा प्राथमिकता वाले सेक्टर में 87.36 लाख रुपये लोन दिया है। इसके साथ ही पूंजी के संकट से जूझ रहा देश का पांचवां बड़ा निजी बैंक डूबने की कगार पर है। फिलहाल डैमेज कंट्रोल के लिए आरबीआई ने कमान अपने हाथ में ले ली है। सरकार के दावे के बावजूद बैंक के ग्राहकों को यकीन नहीं हो रहा है।
बैंक ने दिसंबर 2019 का रिकार्ड भेजा है। इसके जरिए 5.59 करोड़ रुपये जमा है। आरबीआई ने निर्देश दिया है उसके अनुसार काम किया जाना है। - प्रशांत कुमार, एलडीएम