जिले में सड़क निर्माण के नाम पर धनराशि को खुर्दबुर्द करने की फिर तैयारी शुरू कर दी गई है। तीन दिन पहले अखबारों में जिला पंचायत की ओर से 97 स्थानों पर सीसीरोड और खड़ंजे बनाने की परियोजनाओं के लिए जो टेंडर मांगे गए हैं, उसमें कुछ सड़कें बनी हुई हैं तो कुछ जगह पहले से ही खड़ंजा है। इसमें एक सड़क तो ऐसी है जिस पर सांसद निधि से सीसी रोड बन चुकी है। अब जिला पंचायत ने इस पर पांच लाख रुपये की लागत से खड़ंजा कराने का टेंडर निकाल दिया है।
लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़कों को बनाए बगैर उनका लोकार्पण करा देने का मामला अभी चर्चा में था ही कि, अब जिला पंचायत की ओर से सड़क निर्माण के निकाले गए टेंडर पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसमें हसनपुर तहसील क्षेत्र में गंगेश्वरी ब्लाक के महरपुर गुर्जर में मास्टर के मकान से मंदिर की ओर खड़ंजा कार्य कराने के लिए पांच लाख रुपये की अनुमानित लागत का टेंडर मांगा गया है।
इस खड़ंजे को टेंडर खुलने की तारीख 28 अप्रैल से दो माह के भीतर बनाकर तैयार करने को कहा गया है। मजेदार बात यह है कि जिला पंचायत अधिकारी जिस मास्टर के मकान से मंदिर तक खड़ंजा कराने की बात कर रहे हैं, वह सड़क पहले से ही सीसी रोड बनी हुई है। इसे सांसद निधि से 2015-16 में बनवाया गया है। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा ने इस कार्य को पूरा किया है। अब सवाल यह उठता है कि जब मौके पर सड़क सीसी रोड बनी हुई है तो क्या अब जिला पंचायत सीसी रोड उखाड़कर खड़ंजा कराएगी?
खड़ंजों पर मिट्टी कार्य कराने की जरूरत क्यों
जहां जिलेभर के तमाम गांवों में सड़कें बनवाए जाने की जरूरत है, वहां जिला पंचायत ने मार्ग अनुरक्षण मद, परिसंपत्ति अनुरक्षण मद, सामान्य कार्य मद और तेरहवां वित्त आयोग से 97 परियोजनाओं के लिए मांगे टेंडर में कई ऐसी सड़कों को शामिल कर लिया है, जहां पहले से ही खड़ंजा है। अब यहां मिट्टी कार्य कराने के लिए टेंडर मांगा गया है। ब्लॉक धनौरा के ग्राम कुआखेड़ा में धनौरा रोड से मुश्ताक के मकान तक खड़ंजे पर मिट्टी का भराव और जोया के ग्राम चौधरपुर-पायंती रोड पर लेपन कार्य है, इस पर फिर लेपन कार्य करने का निकाला गया टेंडर इसका उदाहरण है। खड़ंजों पर मिट्टी कार्य कराने की जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे ही होते हैं सड़क निर्माण में खेल
जिला पंचायत में इसी तरह से सड़क निर्माण के खेल होते हैं। जो सड़कें सांसद और विधायक निधि से बनी होती हैं, उन्हें जिला पंचायत से फिर बनाने का टेंडर करके धनराशि का गोलमाल अधिकारी और ठेकेदार करते हैं। इसकी लोगों को खबर भी नहीं लगती।
सड़कों का सत्यापन जरूरी
सड़क निर्माण से पहले सड़काें का सत्यापन जरूरी है। सत्यापन की व्यवस्था ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) की ओर से किया जाना है, लेकिन बिना जानकारी किए टेंडर निकाले जाना ही सड़क निधि के नाम पर गोलमाल की आशंका को पैदा कर देता है।
टेंडर निकालने से पूर्व सर्वे कराके सड़कों के नाम जिला पंचायत के अधिकारियों ने दिए हैं। यदि टेंडर में गलत तरीके से सड़क शामिल की गई है तो इसका अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। अपर मुख्य अधिकारी से पूछा जाएगा कि आखिर ऐसा कैसे हुआ। -रेनू चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष