सत्ता की हनक मंगलवार को पायंती कलां गांव में देखने को मिली। इससे पहले रात में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने कई बार कार्यक्रम स्थल पर लगाया गए पंडाल और सजाए गए मंच को हटवाकर दूसरी जगह स्थापित कराया। अगले दिन तक कभी कब्रिस्तान तो कभी ईदगाह स्थल बताकर अधिकारी बसपा नेताओं को गफलत में डाले रहे और एक हफ्ते पहले जिस कार्यक्रम को प्रशासनिक अफसरों ने परमीशन दी थी ऐन वक्त पर उसे रद्द कर दिया। इससे बसपा कार्यकर्ता भड़क गए। जमकर हंगामा किया। उन्होंने क्षेत्रीय सपा विधायक के इशारे पर सम्मेलन में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
गुरुवार को नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र के गांव पायंती कलां स्थित साप्ताहिक बाजार में बहुजन समाज पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन प्रस्तावित था। इसकी परमीशन के लिए 21 अक्तूबर को आवेदन किया गया था, जिसकी बाकायदा एसडीएम ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर 26 अक्तूबर को अनुमति दी थी।
विधानसभा क्षेत्र के बसपा प्रभारी (प्रत्याशी)चौधरी जयदेव सिंह रात से ही कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे थे। करीब 11 बजे पुलिस ने कब्रिस्तान बताकर पहले पंडाल हटवाते हुए दूसरी जगह लगवा दिया। इसके बाद फिर ईदगाह का रास्ता बताते हुए मंच को हटवाया। पुलिस की हरकत से उन्होंने एसपी व डीएम को अवगत कराया। जिनके द्वारा पुलिस को निर्देशित किया गया कि सब ठीक है तो कार्यक्रम होने दिया जाए।
दोपहर 12 बजे सम्मेलन में मुख्य अतिथि अफजल सिद्दीकी हिस्सा लेते, मगर दस बजे एसडीएम ने कोतवाल को फोन कर परमीशन रद्द किए जाने की बात कही। अब जब पुलिस ने बसपा नेताओं को यह बताया तो वह भी हैरान रह गए। रात से परेशान हो रहे बसपा नेताओं ने अफसरों से बातचीत के प्रयास किए, मगर किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। अब जब यह बात कार्यकर्ताओं को मालूम हुई तो वे आग बबूला हो गए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
क्षेत्रीय विधायक अशफाक अली खां के खिलाफ हाय-हाय के नारे लगाकर विरोध जताया। पहले अधिकारियों ने क्यों परमीशन दी थी, इसका जवाब किसी के पास नहीं था। बहरहाल सम्मेलन स्थल पर कार्यकर्ता जमे रहे। देर शाम तक अफसरों से फोन नहीं उठाया तो मायूस होकर वापस चले गए।