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महायोजना : एक साल में सिर्फ कागजी काम

Fri, 22 Aug 2025 02:49 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। शासन से मंजूरी मिलने के बाद जिले में महायोजना को लागू हुए करीब एक साल बीत गया है लेकिन इस समय में सिर्फ कागजी काम ही हुए हैं। इसमें शामिल रिंग रोड बनाने के लिए न तो कोई कवायद शुरू हो सकी है और न ही ट्रांसपोर्ट नगर समेत औद्योगिक विकास के लिए कोई काम शुरू हो सका है। श्रेणीबद्ध जमीनों का बैनामा कराने में भी परेशानी आ रही है। महायोजना के नाम पर एक बरस में केवल खानापूर्ति ही हुई है।
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शहर के विकास को रफ्तार देने के लिए अमृत योजना के तहत करीब एक साल पहले शहर में महायोजना लागू करने की कवायद शुरू की गई थी। सेंटर फॉर सिम्बायोसिस ऑफ टेक्नोलॉजी एन्वायरमेंट एंड मैनेजमेंट (स्टेम) ने अमरोहा शहर व जोया के 35 गांवों का जीआईएस आधारित सर्वे कर मास्टर प्लान तैयार किया गया था।
साल 2031 की जनसंख्या को ध्यान में रखकर तैयार हुई महायोजना से एक नए अमरोहा का विकास कराया जाना है। महायोजना के तहत हुए सर्वे के मुताबिक शहर की जनसंख्या 2031 में चार लाख 13 हजार 820 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी को देखते हुए महायोजना का खाका तैयार किया गया था।
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रिंग रोड बने तो दूर हो जाम की समस्या
अमरोहा में जाम प्रमुख समस्या है। आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को दो-चार होना पड़ता है। इससे निजात दिलाने के लिए शहर के चारों ओर रिंग रोड बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया था। रिंग रोड बने तो शहर के अंदर पहुंचने वाले वाहनों की भीड़ रिंग रोड के सहारे ही शहर को पार सकती है। शहर की जरूरी समस्या में शामिल इस रिंग रोड को बनाए जाने के लिए अभी तक भी कोई कवायद शुरू नहीं हो सकी है।


जेई का न होना भी परेशानी का सबब
विनियमित क्षेत्र में तैनात जेई भानुप्रताप सिंह को रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद बिजनौर से जेई श्याम बाबू को यहां संबद्ध किया गया था लेकिन उनका संबद्धीकरण समाप्त होने के बाद एक माह से भी अधिक समय से किसी जेई की तैनाती नहीं हो सकी है। जेई की तैनाती न होने के कारण भवनों के नक्शे पास नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही अवैध कॉलोनियों पर भी कार्रवाई ठंडी पड़ गई है। महायोजना में आवासीय व औद्योगिक निर्माण के लिए भूमि का वर्गीकरण किया गया था लेकिन जेई की तैनाती न होने के कारण लोग औद्योगिक विकास के लिए निर्धारित भूमि पर आवासीय निर्माण भी कर रहे हैं।


7504.17 हेक्टेयर है विनियमित क्षेत्र का दायरा

महायोजना के अनुसार शहर के विनियमित क्षेत्र का दायरा 7504.17 हेक्टेयर है। महायोजना में आवासीय, व्यवसायिक व अन्य गतिविधियों का अलग-अलग वर्गीकरण किया गया है। महायोजना के लिए आवासीय, व्यवसायिक व अन्य गतिविधियों के लिए जमीनाें की श्रेणी और क्षेत्रफल तय किया गया है। आवासीय श्रेणी की जमीनों पर व्यवसायिक गतिविधियां नहीं हो सकती हैं। साथ ही व्यवसायिक जमीन पर आवासीय निर्माण के लिए बैनामा नहीं कराया जा सकता है। साथ ही हरित पट्टी व पार्क के लिए आरक्षित जमीनों पर कोई भी निर्माण नहीं हो सकता है।
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महायोजना में यह है भू-उपयोग श्रेणी का क्षेत्रफल



भू-उपयोग की श्रेणी - क्षेत्रफल (हेक्टेयर)

आवासीय - 2453.04

व्यावसायिक - 236.37

औद्योगिक - 278.40

सार्वजनिक, सांस्कृतिक सुविधाएं - 483.59
यातायात एवं परिवहन - 500.48
पार्क, खुले स्थल व खेल मैदान व हरित क्षेत्र - 4850.92

संरक्षित वन - 58.01

बाग - 683.51
श्मशान/ कब्रिस्तान - 46.95
तालाब, नदी, नाला, नहर, झील - 112.82

कृषि - 1636.04


विनियमित क्षेत्र में जेई की तैनाती न होने से थोड़ा परेशानी आ रही है। तैनाती के लिए शासन को भी पत्र लिखा गया है। महायोजना को कैसे बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है। इसको भी दिखवाया जाएगा।- शशिभूषण पाठक, एसडीएम/ विनियमित प्राधिकारी
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