अमरोहा/नौगांवा सादात। हजरत इमाम हुसैन के बेटे हजरत इमाम जैनुल आबेदीन की शहादत पर शिया समुदाय में फिजा गमगीन रही। कई स्थानों पर मजलिस के साथ मातम का दौर जारी रहा। हजरत इमाम जैनुल आबेदीन की जिंदगी पर रोशनी डाली गई। मातमी अंजुमनों ने नौहा पेश किया। अजादारों ने मातम करके इमाम जैनुल आबेदीन को खिराजे अकीदत पेश की।
रविवार रात मोहल्ला शफातपोता में इमाम जैनुल आबेदीन का शबीह-ए-ताबूत बरामद होकर इमाम बारगाह शफातपोता पहुंचा। मौलाना डाॅ. अहसन अख्तर ने इमाम की जिंदगी पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इमाम की जिंदगी से हमें समाज में लोगों की खिदमत करने, इंसानियत के लिए कार्य करने और इबादत-ए-इलाही करने का पैगाम मिलता है। मातमी अंजुमनों ने नौहा पेश किया। लोगों ने ताबूत की ज्यारत की।
नौगांवा सादात की तारीखी शब्बेदारी बाद नमाज-ए-ईशा इमाम बारगाह हजरत अली शाह फरीद से शुरू होने के बाद कर्बला पहुंचकर संपन्न हुई। मुजफ्फरनगर, जानसठ, मेरठ, मंगलौर, मेमन सादात समेत 15 मातमी अंजुमनों ने इमाम जैनुल आबेदीन की शान में नौहे पेश किए। अल्लामा सैयद फतेह मोहम्मद ने शिया समुदाय के चौथे इमाम जैनुल आबेदीन की शहादत का बयान पेश किया। इसके बाद नम आंखें के दरमियान गमगीन फिजा में ताबूत बरामद किया गया। दूर-दराज से आए लोगों ने इस ताबूत की ज्यारत की। शब्बेदारी में लखनऊ से आए नौहेखान शहजाद अली ने नौहे पेश किए।